महिषी (सहरसा) से बिनोद कुमार झा
Sanskrit Awareness Rally: संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन का संदेश लेकर बुधवार को महिषी में एक अनोखी जागृति रैली निकाली गई. श्री उग्रतारा वेद विद्या केंद्र के वेदपाठी छात्र-छात्राओं ने गांव की गलियों में वैदिक मंत्रोच्चार और स्तोत्र गायन के साथ जनजागरण अभियान चलाया. रैली के दौरान पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण में डूबा नजर आया. बच्चों ने लोगों को संस्कृत भाषा की उपयोगिता और भारतीय संस्कृति में उसके महत्व से अवगत कराया.
जब गांव की गलियों में गूंजे वैदिक मंत्र
संस्कृत जागृति रैली तारा स्थान से शुरू हुई और गांव के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी. रैली का संयोजन वेद विद्या केंद्र के संस्थापक आचार्य शत्रुघ्न चौधरी ने किया, जबकि मार्गदर्शन उग्रतारा भारती मंडन संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ नंद किशोर चौधरी ने किया. पांच दर्जन से अधिक छात्र-छात्राएं पीत वस्त्रों में सुसज्जित होकर रैली में शामिल हुए. बच्चों ने सामूहिक रूप से वैदिक मंत्रों और स्तोत्रों का पाठ किया, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का माहौल बन गया.
दो दशक से संस्कृत शिक्षा का अलख जगा रहा केंद्र
आचार्य शत्रुघ्न चौधरी ने बताया कि श्री उग्रतारा वेद विद्या केंद्र पिछले लगभग दो दशकों से संस्कृत और वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार में जुटा है. यहां बच्चों को निशुल्क पाठन सामग्री उपलब्ध कराई जाती है. साथ ही शब्द रूप, धातु रूप, वाक्य निर्माण, स्वस्ति वाचन, दुर्गा सप्तशती पाठ और वैदिक कर्मकांडों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है. उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का आधार है.
संस्कृत से जुड़ना समय की मांग
रैली के समापन पर प्राचार्य डॉ नंद किशोर चौधरी ने कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति और सभ्यता की मूल भाषा है. वर्तमान समय में इसके प्रति बढ़ती उदासीनता चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि संस्कृत का अध्ययन न केवल सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करता है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करता है. नई पीढ़ी को संस्कृत शिक्षा से जोड़ना हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है.
जागरूकता से मजबूत होगी सांस्कृतिक विरासत
संस्कृत जागृति रैली के माध्यम से बच्चों ने यह संदेश दिया कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखना आवश्यक है. स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे संस्कृत संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.
