Saharsa Sadar Hospital: सहरसा में दस वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता बच्ची इलाज के लिए अस्पताल पहुंची, लेकिन उसे तत्काल और पर्याप्त चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिल सकी. संवेदनशील मामले में करीब पांच घंटे तक बच्ची के दर्द से कराहने की बात सामने आने के बाद सहरसा के मॉडल सदर अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था सवालों के घेरे में है. महिला चिकित्सक की अनुपलब्धता, उपचार में कथित देरी और बेहतर इलाज के लिए रेफर किये जाने के बाद एंबुलेंस मिलने में हुई देरी ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं.
घटना रविवार की बतायी जा रही है. दुष्कर्म पीड़िता बच्ची को इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया था. ऐसे संवेदनशील मामले में तत्काल चिकित्सा सहायता और विशेष देखभाल की जरूरत होती है. लेकिन परिजनों और मौजूद लोगों के अनुसार बच्ची लंबे समय तक दर्द से तड़पती रही.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बच्ची गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंची थी, तो उसे समय पर पर्याप्त उपचार क्यों नहीं मिल सका?
इमरजेंसी में महिला चिकित्सक क्यों नहीं थी?
मामले में सामने आयी जानकारी के अनुसार इमरजेंसी में महिला चिकित्सक की अनुपलब्धता के कारण उपचार प्रक्रिया प्रभावित हुई. दुष्कर्म पीड़िता के मामले में महिला चिकित्सक की उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जाती है. ऐसे में यदि निर्धारित समय पर महिला चिकित्सक उपलब्ध नहीं थी, तो अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक चिकित्सकीय व्यवस्था क्यों नहीं की, यह सवाल उठ रहा है.
अस्पताल की इमरजेंसी का उद्देश्य ही गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है. ऐसे में कई घंटे तक बच्ची को पर्याप्त उपचार नहीं मिलने की बात सामने आना व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल खड़ा करता है.
रेफर किया, लेकिन एंबुलेंस के लिए भी करना पड़ा इंतजार
सदर अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को बेहतर इलाज के लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, मधेपुरा रेफर किया गया. लेकिन इसके बाद भी परेशानी खत्म नहीं हुई.
आरोप है कि अस्पताल परिसर में एंबुलेंस मौजूद होने के बावजूद बच्ची को तत्काल मधेपुरा नहीं भेजा गया. पुलिस पदाधिकारी की ओर से अनुरोध किये जाने के बाद भी एंबुलेंस उपलब्ध कराने में देरी हुई. बताया गया कि करीब एक घंटे बाद एंबुलेंस बच्ची को लेकर मधेपुरा के लिए रवाना हुई.
यानी एक तरफ बच्ची इलाज के लिए अस्पताल में दर्द से जूझती रही और दूसरी तरफ बेहतर इलाज के लिए रेफर होने के बाद भी उसे दूसरे अस्पताल तक पहुंचने में इंतजार करना पड़ा. इस पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल की इमरजेंसी और रेफरल व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिये हैं.
जिले के सबसे बड़े अस्पताल में ऐसी स्थिति तो जवाबदेह कौन?
मॉडल सदर अस्पताल जिले का प्रमुख सरकारी अस्पताल है. यहां दूर-दराज से लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में किसी दुष्कर्म पीड़िता बच्ची को समय पर चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिलने की बात सामने आना केवल एक मरीज की परेशानी का मामला नहीं है, बल्कि अस्पताल की व्यवस्था और निगरानी से जुड़ा गंभीर प्रश्न है.
यदि महिला चिकित्सक उपलब्ध नहीं थी तो वैकल्पिक व्यवस्था किसने करनी थी? यदि बच्ची को तत्काल बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया तो एंबुलेंस उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किसकी थी? और यदि अस्पताल परिसर में एंबुलेंस मौजूद थी तो उसे समय पर क्यों नहीं भेजा गया? इन सवालों का जवाब अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षित है.
शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन कार्रवाई कितनी?
सरकारी अस्पतालों में इलाज, जांच, दवा और रेफरल व्यवस्था को लेकर मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं. कई बार सामान्य मरीजों की परेशानी उतनी चर्चा में नहीं आ पाती. लेकिन जब मामला किसी दुष्कर्म पीड़िता बच्ची से जुड़ा हो और उपचार में घंटों की देरी का आरोप लगे, तो व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
ऐसे मामलों में केवल उपचार उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं होता. संवेदनशीलता, समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप, आवश्यक जांच और जरूरत पड़ने पर तत्काल रेफरल जैसी व्यवस्थाओं का सुचारु होना भी जरूरी है.
Saharsa Sadar Hospital: अब जांच और जवाबदेही पर टिकी नजर
दुष्कर्म पीड़िता बच्ची के इलाज में कथित देरी और एंबुलेंस उपलब्ध कराने में हुई देरी के आरोपों के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल कार्रवाई का है. क्या पूरे मामले की जांच होगी? क्या यह पता लगाया जाएगा कि महिला चिकित्सक क्यों उपलब्ध नहीं थीं? उपचार में देरी की वजह क्या थी? रेफर किये जाने के बाद एंबुलेंस करीब एक घंटे तक क्यों नहीं भेजी गयी? और इस पूरी प्रक्रिया के दौरान जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे?
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता से जुड़ा है. ऐसे मामलों में चिकित्सा व्यवस्था का संवेदनशील और त्वरित होना बेहद जरूरी है. अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन इन सवालों का जवाब कैसे देता है और क्या मामले में जिम्मेदारी तय की जाती है.
