सहरसा मॉडल सदर अस्पताल में दवाओं का संकट, मरीजों को पर्ची पर मिल रहा सिर्फ घेरा

सहरसा सदर अस्पताल में मरीजों को दवा न मिलने की समस्या गहरा गई है. डॉक्टर लिखीं दवाएं अस्पताल काउंटर पर उपलब्ध नहीं हैं, जिससे गरीब मरीज़ों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

Saharsa Sadar Hospital Medicine Shortage: सहरसा सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीज के हाथ में डॉक्टर की पर्ची है. पर्ची पर पांच दवाएं लिखी हैं, लेकिन जब मरीज दवा काउंटर पर पहुंचता है तो उसके हिस्से में मिलती हैं सिर्फ एक-दो दवाएं. बाकी दवाओं के नाम पर पर्ची पर घेरा लगा दिया जाता है और मरीज को बाजार का रास्ता दिखा दिया जाता है.

सहरसा के मॉडल सदर अस्पताल में गुरुवार को ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे मरीजों ने दवाओं की कमी को लेकर ऐसी ही शिकायत की. मरीजों का कहना है कि डॉक्टर पांच से छह तरह की दवाएं लिख रहे हैं, लेकिन अस्पताल के दवा काउंटर से इनमें से महज एक-दो दवाएं ही मिल पा रही हैं.

मरीजों की शिकायत और पर्चियों की पड़ताल में सामने आया कि कई जरूरी दवाएं अस्पताल के स्टॉक में उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में मरीजों को सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के बाद भी दवाओं के लिए निजी मेडिकल दुकानों का रुख करना पड़ रहा है.

डॉक्टर की पर्ची में पूरी दवा, काउंटर पर पहुंचते ही आधी सूची गायब

ओपीडी में डॉक्टर मरीज की बीमारी के हिसाब से दवाएं लिख रहे हैं. मरीज उम्मीद लेकर दवा काउंटर पर पहुंचते हैं कि सरकारी अस्पताल से उन्हें मुफ्त दवा मिल जाएगी.

लेकिन काउंटर पर उपलब्धता की स्थिति अलग है.

कई मरीजों की पर्ची पर जिन दवाओं का स्टॉक नहीं है, उनके नाम पर घेरा लगा दिया जा रहा है. इसके बाद मरीजों को वे दवाएं बाहर से खरीदने के लिए कहा जा रहा है.

यानी डॉक्टर की पर्ची पर इलाज पूरा है, लेकिन अस्पताल के दवा काउंटर तक पहुंचते-पहुंचते मरीज की जरूरत अधूरी रह जा रही है.

कैल्शियम से लेकर एंटीबायोटिक तक की कमी की शिकायत

मरीजों के अनुसार अस्पताल में कई सामान्य और नियमित रूप से इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं.

इनमें कैल्शियम, विटामिन-सी, बी-कॉम्प्लेक्स कैप्सूल, डिसाइक्लोमिन एचसीएल टैबलेट, डाइक्लोफिनेक सोडियम और मेट्रोनिडाजोल टैबलेट समेत कई दवाओं के नाम शामिल हैं.

इनमें से कई दवाओं का इस्तेमाल सामान्य कमजोरी, पेट दर्द, संक्रमण और दूसरी आम स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में किया जाता है. ऐसे में इनकी उपलब्धता नहीं होने से मरीजों को सीधे बाजार पर निर्भर होना पड़ रहा है.

गरीब मरीजों के लिए मुफ्त इलाज का मतलब क्या रह गया?

मॉडल सदर अस्पताल में दवा संकट का सबसे सीधा असर उन मरीजों पर पड़ रहा है, जो निजी अस्पताल या महंगी मेडिकल दुकानों का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं हैं.

दूर-दराज के गांवों से मरीज इलाज की उम्मीद लेकर सदर अस्पताल पहुंचते हैं. आने-जाने में पैसा खर्च होता है. डॉक्टर से इलाज के बाद जब दवा काउंटर पर जरूरी दवाएं नहीं मिलतीं, तो उन्हें फिर बाहर की दुकान पर जाना पड़ता है.

कुछ मरीजों के लिए यह अतिरिक्त खर्च मामूली नहीं है. कई परिवारों के लिए दवा खरीदना रोजमर्रा के जरूरी खर्चों के बीच एक और बोझ बन जाता है.

दवा काउंटर से लौटे तो मेडिकल दुकानों की ओर बढ़े कदम

गुरुवार को ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे कई मरीज दवा काउंटर से निराश लौटे. अस्पताल परिसर के बाहर स्थित मेडिकल दुकानों पर भी मरीज दवाएं तलाशते नजर आए.

जिनके पास पैसे थे, उन्होंने बाजार से दवा खरीद ली. लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर कुछ मरीजों के सामने दूसरा विकल्प नहीं था.

मरीजों की शिकायत है कि अगर अस्पताल में डॉक्टर दवा लिखते हैं तो कम से कम जरूरी दवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित होनी चाहिए.

करोड़ों की स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच सामान्य दवाओं का संकट क्यों?

मॉडल सदर अस्पताल सहरसा जिले के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल है. यहां जिले के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं.

ऐसे में दवा की नियमित आपूर्ति केवल अस्पताल की सुविधा का विषय नहीं, बल्कि सीधे मरीजों के इलाज से जुड़ा मामला है.

अगर डॉक्टर द्वारा लिखी गई जरूरी दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं, तो सवाल उठता है कि स्टॉक की निगरानी कैसे हो रही है? दवाओं की मांग कब भेजी जाती है? आपूर्ति में देरी कहां हो रही है? और जिन दवाओं का स्टॉक खत्म होने वाला है, उनकी वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की जाती?

इन सवालों का जवाब मिलने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दवा संकट का कारण आपूर्ति में देरी है, स्टॉक प्रबंधन की समस्या है या अस्पताल स्तर पर निगरानी में कमी.

सिविल सर्जन बोले- जांच करेंगे, दोषी पर कार्रवाई होगी

मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद से बात की गई. उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जाएगी कि कौन ऐसी दवाएं लिख रहा है और अस्पताल में लिखी गई दवाओं का स्टॉक उपलब्ध है या नहीं.

उन्होंने कहा कि इस संबंध में संबंधित लोगों को सख्त चेतावनी दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी की जाएगी.

सिविल सर्जन ने कहा कि पहले यह देखा जाएगा कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाएं अस्पताल में उपलब्ध हैं या नहीं. इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी.

उन्होंने अस्पताल और आईसीयू की व्यवस्था को लेकर बताया कि सेंट्रल एसी के लिए लिखा-पढ़ी की गई है. हालांकि, उनके अनुसार हर बेड पर पंखा और दीवार पर पंखे की व्यवस्था है.

डीपीएम की अनुपस्थिति के संबंध में उन्होंने बताया कि डीपीएम अपने पिता की तबीयत खराब होने के कारण घर गई हैं. उन्होंने कहा कि इस संबंध में डीएस से बात कर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

Saharsa Sadar Hospital Medicine Shortage: अब जांच से साफ होगा दवा संकट का असली कारण

मरीजों की शिकायत के बाद अब सबसे अहम सवाल यही है कि मॉडल सदर अस्पताल में जिन दवाओं की कमी बतायी जा रही है, उनका वास्तविक स्टॉक कितना है और आपूर्ति व्यवस्था में कमी कहां है.

सिविल सर्जन ने जांच का भरोसा दिया है. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या सामने आता है और मरीजों को अस्पताल में लिखी गई जरूरी दवाएं कब तक उपलब्ध होने लगती हैं.

Also Read: नेपाल की बाढ़ के बाद गंडक में बढ़ा पानी, बैराज से 3 बार छोड़ा गया, 3 मीटर तक उठ सकती हैं लहरें, CM सम्राट ने क्या कहा?

Also Read: बाढ़ के खतरे के बीच CM सम्राट ने इन इलाकों का किया हवाई सर्वे, NDRF-SDRF की टीम अलर्ट, रेल प्रशासन भी तैयार


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By अंजन आर्यन सिंह

पत्रकारिता में 14 वर्षों का अनुभव. अब तक लगातार सहरसा से क्राइम और स्वास्थ्य की खबरें संकलित करता हूं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >