सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट
Saharsa News : जिले में कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) की अधिप्राप्ति में हो रही देरी को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने बुधवार को समीक्षा बैठक कर सभी मिलर संचालकों को 10 जून तक लंबित सीएमआर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को हर हाल में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सीएमआर नहीं गिराने वाले मिलरों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. बैठक में जिला सहकारिता विभाग और मिलर संचालकों के बीच लंबित मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई.
लक्ष्य बड़ा, उपलब्धि अभी अधूरी
समीक्षा बैठक में बताया गया कि जिले को कुल 35,030 मीट्रिक टन सीएमआर अधिप्राप्ति का लक्ष्य मिला है. इसके मुकाबले अब तक केवल 24,540 मीट्रिक टन सीएमआर ही प्राप्त हो सका है. यानी लक्ष्य का बड़ा हिस्सा अभी भी अधूरा है. प्रशासन का मानना है कि समय पर सीएमआर जमा नहीं होने से सरकारी खरीद व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.
कई मिलरों के यहां लंबित है सीएमआर
बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई मिलर एसटीआर कटने के बाद भी निर्धारित समय पर सीएमआर जमा नहीं कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार जेजीजी फार्म फूड इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के पास सबसे अधिक लंबित सीएमआर है. यहां 21 एसटीआर कटने के बावजूद सीएमआर जमा नहीं किया गया है. इसके अलावा मीना राइस मिल के 15 एसटीआर और एसपी राइस मिल समेत अन्य इकाइयों में भी सीएमआर लंबित पाया गया.
डीएम ने दिया अंतिम अल्टीमेटम
जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने बैठक में मौजूद मिलर संचालकों को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि 10 जून तक सभी लंबित सीएमआर एफसीआई को उपलब्ध कराना होगा. उन्होंने जिला सहकारिता पदाधिकारी को निर्देश दिया कि समय सीमा समाप्त होने के बाद भी सीएमआर नहीं गिराने वाले मिलरों को चिन्हित कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए.
मिलरों ने दिया लक्ष्य पूरा करने का भरोसा
बैठक में जिले के सात उसना और एक अरवा मिल के संचालक मौजूद थे. जिला सहकारिता पदाधिकारी जयप्रकाश सिंह और बीएसएससी प्रबंधक संतोष कुमार भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए. चर्चा के दौरान सभी मिलर संचालकों ने प्रशासन को आश्वस्त किया कि वे 10 जून तक शत-प्रतिशत लंबित सीएमआर जमा कर देंगे.
