High Mast Light Scam: सहरसा जिले के नगर परिषद सिमरी बख्तियारपुर में हाई मास्ट लाइट लगाने की योजना में सरकारी राशि के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. विभाग का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कार्य अधूरा रहने के बावजूद एजेंसी को 1 करोड़ 54 लाख 29 हजार 492 रुपये का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है.
सावन मेले के लिए जारी हुआ था कार्यादेश
नगर विकास एवं आवास विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा 21 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार सावन मेले के दौरान श्रद्धालुओं और कांवरियों की सुविधा के लिए कांवरिया पथ सहित नगर के विभिन्न स्थानों पर हाई मास्ट लाइट लगाने की योजना बनाई गई थी. जेम पोर्टल के माध्यम से निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद 25 मार्च 2025 को राजस्थान के हनुमानगढ़ टाउन स्थित मेसर्स श्री राम एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर जोगिंद्र कुमार को कार्यादेश जारी किया गया था.
अधूरे कार्य पर पूरा भुगतान करने का आरोप
विभागीय प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया कि एजेंसी निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं कर सकी. इसके बावजूद नगर परिषद द्वारा एजेंसी को 1 करोड़ 54 लाख 29 हजार 492 रुपये का भुगतान कर दिया गया. विभाग ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए प्रथम दृष्टया सरकारी राशि के गबन का मामला माना है.
चार सदस्यीय जांच समिति गठित
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है. समिति के अध्यक्ष संयुक्त सचिव सुनील कुमार बनाए गए हैं. अधीक्षण अभियंता हरेन्द्र कुमार उपाध्याय, सहायक अभियंता अमित कुमार तथा प्रशाखा पदाधिकारी धर्मेन्द्र कुमार साह को सदस्य बनाया गया है.समिति को निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश, कार्य की वास्तविक प्रगति, भुगतान संबंधी अभिलेख, मापी पुस्तिका, उपयोगिता प्रमाणपत्र सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही यह भी पता लगाने को कहा गया है कि कार्य अधूरा रहने के बावजूद भुगतान किन परिस्थितियों में किया गया और इसके लिए कौन-कौन अधिकारी या कर्मी जिम्मेदार हैं.
दो सप्ताह में मांगी गई जांच रिपोर्ट
High Mast Light Scam: नगर विकास एवं आवास विभाग ने जांच समिति को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश दिया है. रिपोर्ट में अनियमितता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित एजेंसी की भूमिका स्पष्ट करने को कहा गया है, ताकि दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सके.
