सहरसा : सहरसा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और आमंत्रित अतिथियों के सम्मान के साथ हुई. इस दौरान विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के साथ जीवन-कौशल विकसित करने के महत्व की जानकारी दी गयी.
बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की सीख
कार्यक्रम में आमंत्रित वक्ता वीरेंद्र मोहन ने ‘बियोंड द ब्लूप्रिंट’ विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया. वहीं वीणा मोहन ने ‘एसेंशियल स्किल्स : द इनफिनिटी सेल्फ लाइफ’ विषय पर अपने विचार रखे.
वक्ताओं ने कहा कि आज के बदलते दौर में केवल तकनीकी ज्ञान के आधार पर सफलता हासिल करना पर्याप्त नहीं है. विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच, नेतृत्व क्षमता, प्रभावी संवाद, समस्या समाधान और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता भी विकसित करनी चाहिए.
करियर के साथ निजी जीवन में भी काम आएंगी ये स्किल
विद्यार्थियों को ऐसे जीवन-कौशल सीखने के लिए प्रेरित किया गया, जो शिक्षा पूरी करने के बाद उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में लंबे समय तक उपयोगी साबित हों. वक्ताओं ने कहा कि तकनीकी दक्षता के साथ बेहतर व्यवहार, आत्मविश्वास और परिस्थितियों से निपटने की क्षमता विद्यार्थियों के भविष्य को मजबूत बनाती है.
आयोजन में इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी प्रसाद का मार्गदर्शन और सहयोग महत्वपूर्ण रहा. असिस्टेंट प्रोफेसर सह इंडक्शन प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर कृष्ण कुमार ने कार्यक्रम के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.
कार्यक्रम का संचालन अल्ताफ हसन ने किया, जबकि अंकित कुमार और पीयूष कुमार ने आयोजन एवं व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली. अंत में अतिथियों, शिक्षकों और आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया गया.
कार्यक्रम में छात्रों को मिली ये सीख
- तकनीकी शिक्षा के साथ जीवन-कौशल भी जरूरी.
- सकारात्मक सोच और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर.
- प्रभावी संवाद और समस्या समाधान की क्षमता जरूरी.
- बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की सीख.
- व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में लंबे समय तक उपयोगी स्किल विकसित करने पर जोर.
