सहरसा की 51 साल पुरानी रौनियार धर्मशाला को मिलेगा नया रूप, समाज के लोगों ने मिलकर उठाने का लिया संकल्प

सहरसा की 51 साल पुरानी रौनियार वैश्य धर्मशाला, जिसे समाज की पीढ़ियों ने मिलकर बनाया था, अब जीर्णोद्धार की राह देख रही है. समाज के लोगों ने एकजुट होकर इसे फिर से भव्य बनाने का संकल्प लिया है. यह पहल न केवल एक धरोहर को बचाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत सामाजिक आधार भी तैयार करेगी.

Rouniyar Vaishya Dharamshala Saharsa: एक धर्मशाला, जिसे बनाने में समाज की कई पीढ़ियों ने अपना तन-मन-धन लगाया था, आज अपने जीर्णोद्धार का इंतजार कर रही है. वर्ष 1975 में सामूहिक सहयोग से बनी रौनियार वैश्य धर्मशाला की मौजूदा स्थिति को लेकर समाज के लोगों ने चिंता जतायी है. अब इसे फिर से भव्य रूप देने की पहल शुरू करने का निर्णय लिया गया है.

बनगांव रोड स्थित रौनियार वैश्य धर्मशाला में जिला इकाई सहरसा की बैठक आयोजित हुई. इसमें धर्मशाला के जीर्णोद्धार के साथ समाज के विकास और आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत सामाजिक आधार तैयार करने पर विस्तार से चर्चा हुई.

बैठक में सदस्यों ने एकजुट होकर धर्मशाला को बेहतर बनाने का संकल्प लिया. समाज के लोगों का कहना था कि जिस भवन के निर्माण में देश-विदेश में रहने वाले स्वजाति बंधुओं तक ने योगदान दिया, उसकी विरासत को बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है.

1975 में सामूहिक सहयोग से खड़ी हुई थी धर्मशाला

रौनियार वैश्य धर्मशाला का निर्माण वर्ष 1975 में समाज के सामूहिक सहयोग से हुआ था. बैठक में सदस्यों ने धर्मशाला के निर्माण से जुड़ी पुरानी यादों को साझा किया.

नरेश प्रसाद गुप्ता ने बताया कि धर्मशाला के भूमि पूजन के लिए चांदी की करनी का प्रयोग किया गया था. गंगासागर गुप्ता और शिवशंकर गुप्ता ने बताया कि धर्मशाला के निर्माण के लिए जमीन तेतरवती देवी ने दान में दी थी.

पंकज गुप्ता और गिरधारी गुप्ता ने बताया कि धर्मशाला के निर्माण में देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में रहने वाले स्वजाति बंधुओं ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया था.

यानी यह भवन केवल ईंट-पत्थर से बनी एक धर्मशाला नहीं है, बल्कि समाज के सामूहिक सहयोग और एकजुटता की निशानी है.

अब फिर सामूहिक सहयोग से बदलेगी तस्वीर

बैठक में धर्मशाला की मौजूदा स्थिति को लेकर सबसे अधिक चर्चा हुई. सदस्यों ने कहा कि वर्षों पहले जिस सामूहिक भावना से धर्मशाला का निर्माण हुआ था, उसी भावना के साथ अब इसके जीर्णोद्धार की जरूरत है.

अध्यक्ष संतोष गुप्ता ने कहा कि रौनियार धर्मशाला समाज के पूर्वजों की धरोहर है. सभी रौनियार वैश्य समाज के सदस्यों के सहयोग से जल्द ही इसका जीर्णोद्धार कर इसे भव्य रूप देने का प्रयास किया जायेगा.

उन्होंने समाज के लोगों से इस पहल में सहयोग करने की अपील की.

छोटी पहल भी बन सकती है बड़े बदलाव की नींव

बैठक का संचालन नीरज सोनू ने किया, जबकि अध्यक्षता संतोष गुप्ता ने की. बैठक में समाज के विकास और भविष्य की योजनाओं को लेकर विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया.

पप्पू गुप्ता ने कहा कि पहल भले ही छोटी हो, लेकिन अगर सभी लोग ईमानदारी, एकजुटता और सहयोग की भावना से आगे बढ़ें तो आने वाले समय में यही प्रयास सहरसा के रौनियार वैश्य समाज के लिए मजबूत भविष्य की नींव बन सकता है.

उनके अनुसार किसी भी सामाजिक संस्था या धरोहर को लंबे समय तक बेहतर स्थिति में रखने के लिए सामूहिक भागीदारी जरूरी है.

आने वाली पीढ़ियों के लिए बचानी है विरासत

बैठक में मौजूद सदस्यों ने कहा कि धर्मशाला के निर्माण में समाज की कई पीढ़ियों का योगदान रहा है. ऐसे में इसकी वर्तमान स्थिति में सुधार करना केवल कुछ लोगों की जिम्मेदारी नहीं हो सकती.

इसके जीर्णोद्धार, रखरखाव और बेहतर उपयोग के लिए समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर ठोस पहल करने पर जोर दिया गया.

सदस्यों ने समाज की एकता, विकास और सम्मान को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर सामाजिक आधार तैयार करने की बात कही.

Rouniyar Vaishya Dharamshala Saharsa: समाज के लोग हुए शामिल

बैठक में ओमप्रकाश गुप्ता, आकाश गुप्ता, शेखर सुमन, राजेंद्र गुप्ता, मुकेश गुप्ता, गणेश प्रसाद गुप्ता, अनिल गुप्ता, जितेंद्र गुप्ता, अरुण कुमार, राजेश कुमार, दुर्गा प्रसाद गुप्ता, अमरेंद्र गुप्ता, दामोदर गुप्ता, अशोक प्रसाद गुप्ता, सुधीर गुप्ता, किशोर गुप्ता, संतन गुप्ता, शिशुपाल गुप्ता, प्रमोद गुप्ता, संजय प्रसाद गुप्ता, बिनोद गुप्ता, संजीव गुप्ता और शंभू गुप्ता सहित बड़ी संख्या में स्वजाति बंधु मौजूद थे.

बैठक में हुए निर्णय के बाद अब समाज के लोगों की नजर धर्मशाला के जीर्णोद्धार की अगली पहल पर है. अगर सामूहिक सहयोग से योजना जमीन पर उतरती है, तो करीब पांच दशक पुरानी यह सामाजिक धरोहर एक बार फिर नये रूप में सामने आ सकती है.

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लेखक के बारे में

By दीपांकर श्रीवास्तव

दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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