सहरसा: 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, थानों को 3,068 नोटिसों के त्वरित तामिले का सख्त निर्देश

सहरसा में 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियां तेज हो गई हैं। थानाध्यक्षों को 3,068 लंबित मामलों के नोटिसों का 24 अगस्त तक तामिला कराने का कड़ा निर्देश दिया गया है।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (NALSA) एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (BSLSA) के निर्देशानुसार आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सहरसा जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं. अधिकाधिक सुलहनीय और वर्षों से लंबित मामलों के सौहार्दपूर्ण निष्पादन के उद्देश्य से शुक्रवार को जिले के सभी थानाध्यक्षों एवं उनके प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें नोटिस तामिला प्रक्रिया में तेजी लाने के कड़े निर्देश जारी किए गए.

न्यायिक पदाधिकारियों की मौजूदगी में हुई महत्वपूर्ण बैठक

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष (DLSA) सहरसा, दिनेश शर्मा के निर्देश पर यह समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में डीएएसजे (द्वितीय) चंदन कुमार, डीएएसजे (तृतीय) मो. तारीक मुस्तफा, डीएएसजे (षष्ठम) राकेश कुमार राकेश, एसीजेएम (द्वितीय) मो. कुद्दुस अंसारी तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव संजय कुमार सरोज मुख्य रूप से उपस्थित रहे. बैठक में लोक अदालत के व्यापक प्रचार-प्रसार और अधिक से अधिक पक्षकारों को जोड़ने की रणनीति पर गहन विमर्श किया गया.

24 अगस्त तक हर हाल में तामिला कराने का निर्देश

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अनुसार, 21 अगस्त तक जिले के विभिन्न थानों को कुल 3,068 नोटिस हस्तगत कराए जा चुके हैं.

न्यायिक पदाधिकारियों ने सभी थानाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिया कि इन सभी 3,068 नोटिसों का तामिला संबंधित पक्षकारों तक आगामी सोमवार, 24 अगस्त तक शत-प्रतिशत सुनिश्चित कराया जाए. प्राधिकार ने दो टूक कहा कि थाना स्तर पर नोटिस तामिला की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. पुलिस प्रशासन का सहयोग इस आयोजन को सफल बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

इन मामलों का कराया जा सकता है त्वरित व निःशुल्क निपटारा

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और प्राधिकार के सचिव ने आम नागरिकों से राष्ट्रीय लोक अदालत का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की है. लोक अदालत के माध्यम से निम्नलिखित मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान कराया जा सकता है:

  • सभी प्रकार के सुलहनीय आपराधिक एवं दीवानी (सिविल) लंबित वाद
  • धारा 138 (चेक बाउंस) से जुड़े मामले
  • मोटर वाहन दुर्घटना दावा (MACT) वाद
  • बिजली बिल, पानी बिल और टेलीफोन बिल विवाद
  • बैंक ऋण एवं रिकवरी से जुड़े मामले
  • ट्रैफिक चालान से संबंधित मामले

प्राधिकार ने जिलेवासियों से 12 सितंबर को व्यवहार न्यायालय परिसर पहुंचकर अपने विवादों का आपसी सहमति से स्थायी व त्वरित समाधान कराने का आह्वान किया है.


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By Vinay Kumar Mishra

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