साहित्य अकादमी के परिसंवाद में हुआ मैथिली कविता पर विमर्श
सहरसा. भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय, साहित्य अकादमी एवं संस्कृति मिथिला द्वारा पीजी सेंटर सभागार में रविवार को एक दिवसीय परिसंवाद का आयोजन किया गया. उद्घाटन सत्र में विषय प्रवर्तन करते काठमांडू से आये प्रसिद्ध साहित्यकार रमेश रंजन ने कहा कि कविता को समकालीन समय का आइना होना चाहिए. बीज वक्तव्य मैथिली परामर्श मंडल सदस्य रमण कुमार सिंह ने दिया. स्वागत भाषण करते साहित्य अकादमी नयी दिल्ली से आये संपादक नीरज कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते कार्यक्रम की सार्थकता को रेखांकित किया. कवि रामकुमार सिंह की अध्यक्षता एवं किसलय कृष्ण के संचालन में चले उद्घाटन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन संस्कृति मिथिला के कार्यकारी अध्यक्ष तरुण झा ने किया. सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में पीजी सेंटर के परिसर प्रभारी डॉ इम्तियाज अंजुम मौजूद रहे. विमर्श के पहले सत्र में मैथिली कविता की नयी प्रवृत्तियों पर जमकर चर्चा हुई. जिसमें डॉ कंचन दीपा, डॉ अरुण कुमार सिंह, डॉ अरुणाभ सौरभ सहित अन्य ने अपने विचार व्यक्त करते आलेख पाठ किया. प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ तारानंद वियोगी की अध्यक्षता में सत्र संचालन डॉ भास्कर ज्योति ने किया. अंतिम सत्र का आयोजन एलएनजे महाविद्यालय झंझारपुर के प्राचार्य डॉ नारायण झा की अध्यक्षता एवं कुमार विक्रमादित्य के संचालन में संपन्न हुआ. जिसमें डॉ धर्मव्रत चौधरी, डॉ सुमन कुमार, रुपम झा, पल्लवी मंडल ने मैथिली कविता पर केंद्रित आलेख पाठ किया. पीजी सेंटर में प्रसिद्ध कवि लेखक महाप्रकाश की स्मृति को समर्पित अस्थायी सभागार में अकादेमी के इस आयोजन में डॉ संजय वशिष्ठ लिखित पुस्तक लोक देव कारु खिरहर सहित गोसाईं भंडार, डॉ भवानंद मिश्र, आशीष कुमार की नव प्रकाशित किताबों का लोकार्पण हुआ. इस मौके पर डॉ सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ कुमारी अपर्णा, डॉ प्रत्यक्षा राज, डॉ उमेश कुमार मंडल, डॉ विनीत लाल दास, रणविजय राज, दिलीप झा दर्दी सहित सैकड़ों लोगों मौजूद रहे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
