सहरसा के MLT कॉलेज में चुनावी साक्षरता कार्यशाला: 18 वर्ष के युवाओं को फॉर्म-6 भरने की सीख, देखें प्रोफेसरों की अपील

सहरसा के MLT कॉलेज में चुनावी साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई. युवा मतदाताओं को उनके वोट के अधिकार और प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया गया. कॉलेज प्राचार्य ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया.

सहरसा स्थित प्रतिष्ठित मनोहर लाल टेकरीवाल (एमएलटी) कॉलेज में मंगलवार को साक्षरता निर्वाचन क्लब (Electoral Literacy Club) के तत्वावधान में मतदाता जागरूकता एवं सहभागिता को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक सह कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का संयोजन क्लब के समन्वयक डॉ. बलवीर कुमार झा ने किया, जबकि अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) सुधीर कुमार सिंह ने की.

बैठक का मुख्य उद्देश्य कॉलेज के युवा छात्र-छात्राओं, विशेषकर 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे नए मतदाताओं को निर्वाचन प्रक्रिया, मतदाता सूची में पंजीकरण तथा लोकतांत्रिक प्रणाली में उनके अमूल्य योगदान के प्रति सजग करना रहा.

'जागरूक मतदाता ही सशक्त समाज का निर्माता': प्रधानाचार्य प्रो. सुधीर सिंह

अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) सुधीर कुमार सिंह ने युवाओं की लोकतांत्रिक शक्ति को रेखांकित किया:

  • राष्ट्र के वास्तविक कर्णधार: उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी देश के भविष्य की रीढ़ है. समाज का वास्तविक सशक्तिकरण तभी संभव है जब हमारे युवा न केवल अपने अधिकारों के प्रति सचेत हों, बल्कि एक जागरूक और प्रबुद्ध नागरिक के रूप में मतदान प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं.
  • मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना पहली प्राथमिकता: मास्टर ट्रेनर मायानंद एवं बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) ओमप्रकाश ने छात्र-छात्राओं को फॉर्म-6 के माध्यम से मतदाता सूची में नाम जोड़ने की तकनीकी प्रक्रिया से अवगत कराया. उन्होंने जोर दिया कि मजबूत लोकतंत्र की नींव प्रत्येक नागरिक के वोट पर टिकी है, इसलिए सभी अर्हता प्राप्त युवा अपना नाम सूची में अवश्य दर्ज कराएं.

एकल मतदान पद्धति और लिच्छवी की ऐतिहासिक विरासत पर चर्चा

कार्यशाला के दौरान राजनीति शास्त्र और सामाजिक परिप्रेक्ष्य से जुड़े अहम बिंदुओं पर विचार रखे गए:

  • लिच्छवी गणराज्य की ऐतिहासिक सीख: राजनीति विज्ञान के सहायक प्राध्यापक डॉ. गौतम ने भारत की एकल मतदान पद्धति, संवैधानिक व्यवस्था तथा प्राचीन वैशाली के लिच्छवी गणराज्य की लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को निर्भीक और जागरूक होकर मतदान करने की प्रेरणा दी.
  • नैतिक जिम्मेदारी और विवेकपूर्ण फैसला: मीडिया प्रभारी डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि मतदान केवल एक संवैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व भी है. वहीं, डॉ. महेश राम ने रेखांकित किया कि बिना किसी प्रलोभन या दबाव के निष्पक्ष व विवेकपूर्ण मतदान करना ही लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव है.

मंच संचालन और प्रमुख शिक्षकों की सहभागिता

कार्यक्रम का प्रभावी और सलीकेदार मंच संचालन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मयंक भार्गव ने किया, जबकि सत्र के अंत में कैंपस एंबेसडर डॉ. बी. एन. झा ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया.

इस अवसर पर मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. सुमन कुमार, डॉ. दीप्ति, डॉ. अन्नू कुमारी, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. एकता कुमारी, डॉ. रौशन कुंवर, अंशु कुमारी, डॉ. कोमल, डॉ. देवदत्त, डॉ. गोपाल झा, डॉ. हिमांशु, डॉ. मुकेश, डॉ. नंद किशोर सहित महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, शिक्षकेतर कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.

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By Vinay Kumar Mishra

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