यूपी के खेतों में भी लहलहाएगा बिहार का 'सफेद सोना': सहरसा के अगवानपुर में मखाना की वैज्ञानिक खेती सीखने पहुंचे 5 उद्यान अधिकारी और प्रगतिशील किसान

मखाना की उन्नत खेती अब यूपी में भी होगी. सहरसा में किसानों और अधिकारियों को सिखाई जा रही है मखाना की वैज्ञानिक तकनीक, जो बढ़ाएगी आय.

बिहार का 'सफेद सोना' और वैश्विक सुपरफूड बन चुके मखाना की उन्नत खेती का दायरा अब पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश तक फैलने लगा है. मखाना उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक, जलवायु अनुकूल प्रबंधन, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) की व्यावहारिक जानकारी साझा करने के उद्देश्य से सहरसा स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, अगवानपुर में सोमवार से तीन दिवसीय विशेष एक्सपोजर विजिट सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ.

इस उच्चस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे प्रगतिशील किसानों के साथ-साथ यूपी के पांच वरिष्ठ उद्यान अधिकारी भी विशेष रूप से भाग ले रहे हैं. कार्यक्रम की अध्यक्षता अनुसंधान केंद्र के सह निदेशक अनुसंधान डॉ. दिलीप कुमार महतो ने की.

अयोध्या, बहराइच और कुशीनगर के उद्यान अधिकारी बने विशिष्ट अतिथि

प्रशिक्षण सत्र के उद्घाटन अवसर पर उत्तर प्रदेश के कई जिलों के शीर्ष कृषि व उद्यान अधिकारी उपस्थित रहे.

विशिष्ट अतिथि के रूप में अयोध्या के जिला उद्यान अधिकारी धर्मेंद्र चंद्र चौधरी, बहराइच के जिला उद्यान अधिकारी दिनेश चौधरी, कुशीनगर के जिला उद्यान अधिकारी कृष्ण कुमार चौधरी तथा संत कबीर नगर के जिला उद्यान अधिकारी समुद्र गुप्त मल्ल ने मंच साझा किया. केंद्र के सह निदेशक डॉ. दिलीप कुमार महतो ने अपने संबोधन में कहा कि इस एक्सपोजर विजिट के जरिए यूपी के किसानों को मखाना की आधुनिक तकनीक को करीब से समझने और उसे अपने क्षेत्रों के जलाशयों में लागू करने का बेहतरीन अवसर मिलेगा.

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'कोसी अंचल के लिए गर्व का क्षण': डॉ. एमडी ओझा

केंद्र के वरीय वैज्ञानिक डॉ. एमडी ओझा ने कहा कि यह समूचे बिहार और कोसी क्षेत्र के लिए अत्यंत गौरव की बात है कि अब दूसरे राज्यों के प्रशासनिक अधिकारी और किसान मखाना की उन्नत तकनीक सीखने सहरसा की धरती पर आ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि मखाना उत्पादन की विकसित तकनीकों के प्रसार से किसानों की आय में कई गुना इजाफा होगा और उन्हें पारंपरिक धान-गेहूं के चक्र से इतर अत्यधिक लाभकारी नकदी फसल का मजबूत विकल्प मिलेगा. मंच संचालन करते हुए गृह वैज्ञानिक डॉ. सुनीता पासवान ने मखाना लावा तैयार करने, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार की असीम संभावनाओं पर रोशनी डाली.

बुआई से लेकर कटाई और मौसम प्रबंधन के बताए गुर

प्रशिक्षण के प्रथम तकनीकी सत्र में वरिष्ठ कृषि मौसम वैज्ञानिक रामानंद पटेल ने किसानों को मखाना की नर्सरी तैयार करने, बुआई और कटाई की वैज्ञानिक कार्यप्रणाली समझाई. उन्होंने बदलते मौसम और जलवायु के अनुकूल फसल प्रबंधन के अहम सूत्र साझा किए.

इसके बाद दूसरे तकनीकी सत्र में डॉ. देवान कुमार चौधरी ने उन्नत प्रभेदों (वैरायटी) के चयन और कीट प्रबंधन पर विस्तृत व्याख्यान दिया. उद्घाटन सत्र के अंत में डॉ. देवन चौधरी ने आगंतुक अधिकारियों और किसानों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया.

खेतों और प्रोसेसिंग यूनिट्स का कराया जाएगा फील्ड विजिट

तीन दिनों तक चलने वाले इस सघन शिविर में अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक विभिन्न सत्रों में मखाना प्रसंस्करण और विपणन की तकनीकी बारीकियां सिखाएंगे.

अधिकारियों और किसानों को केवल थ्योरी तक सीमित न रखकर मखाना उत्पादन वाले प्राकृतिक तालाबों, जलजमाव वाले प्रक्षेत्रों और प्रोसेसिंग यूनिट्स का प्रत्यक्ष भ्रमण कराया जाएगा. इस व्यावहारिक प्रशिक्षण से उत्तर प्रदेश के किसान अपने गृह जिलों में लौटकर बड़े पैमाने पर मखाना उत्पादन की नई इबारत लिखने के लिए तैयार होंगे.

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By Vinay Kumar Mishra

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