सहरसा जिले के महिषी प्रखंड में स्थित प्रसिद्ध व ऐतिहासिक मां उग्रतारा का भव्य मंदिर आस्था, आध्यात्म और तांत्रिक शक्ति साधना का एक अद्भुत संगम है. कोसी प्रमंडल ही नहीं, बल्कि समूचे बिहार, नेपाल और देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां माता के चरणों में शीश नवाने पहुंचते हैं.
सनातन और शाक्त परंपरा में यह मान्यता सदियों से चली आ रही है कि मां उग्रतारा के इस जाग्रत दरबार में सच्चे मन से लगाई गई हर गुहार स्वीकार होती है और कोई भी भक्त यहां से निराश नहीं लौटता.
प्राचीन काल से शक्ति और तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र
महिषी स्थित मां उग्रतारा का यह पावन धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि एक उच्च कोटि का शक्तिपीठ माना जाता है:
- अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा: मंदिर परिसर में कदम रखते ही श्रद्धालुओं को एक दिव्य शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है.
- साधकों की तपस्थली: यह पीठ सदियों से तांत्रिकों और उच्च साधकों के लिए सिद्धि प्राप्ति का मुख्य केंद्र रहा है. यहां की गुप्त साधनाओं और विशेष अनुष्ठानों की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है.
- सौंदर्यीकरण से बढ़ी भव्यता: हाल के वर्षों में स्थानीय प्रशासन और न्यास समिति द्वारा किए गए जीर्णोद्धार व सौंदर्यीकरण कार्यों के बाद मंदिर प्रांगण का स्वरूप और अधिक मनोहारी व भव्य हो गया है.
नवरात्र में उत्सव का माहौल, गूंजते हैं वैदिक मंत्र
यूं तो सामान्य दिनों में भी मंदिर में सुबह की मंगला आरती से लेकर देर शाम तक भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन शारदीय व चैत्र नवरात्र के पावन दिनों में यहां का दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है:
- दिन-रात भक्ति रस: प्रात:काल से ही वैदिक पुरोहितों द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ, महाआरती और भजन-कीर्तन का अनवरत सिलसिला चलता है.
- भव्य श्रृंगार व बलि परंपरा: विशेष अवसरों पर माता की प्रतिमा का अलौकिक पुष्पों और पारंपरिक गहनों से भव्य श्रृंगार किया जाता है. मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालुओं द्वारा छाग (बकरे) और पाड़ा की पारंपरिक बलि अर्पित करने की भी पौराणिक प्रथा यहां जीवित है.
- संध्या महाआरती: ढोल, नगाड़ों, शंख और घंटियों के दिव्य नाद के बीच होने वाली संध्या आरती में भाग लेने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु घंटों इंतजार करते हैं.
धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय समृद्धि का प्रतीक
मां उग्रतारा का यह दरबार सहरसा जिले को राष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करता है:
- सैलानियों व श्रद्धालुओं का केंद्र: पूजा-अर्चना के अलावा लोग यहां की समृद्ध ऐतिहासिक व मिथिला-कोसी संस्कृति के दर्शन करने आते हैं.
- क्षेत्रीय जनजीवन पर कृपा: स्थानीय नागरिकों का अटूट विश्वास है कि मां उग्रतारा की असीम अनुकंपा से ही कोसी के इस भू-भाग में सुख, शांति और समृद्धि निरंतर बनी रहती है.
