सहरसा में भूमि सर्वेक्षण ने पकड़ी रफ्तार, पुराने कागजातों की बढ़ी मांग

Land Survey Saharsa: बिहार में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण अभियान का असर अब गांवों में साफ दिखने लगा है. सहरसा के बनमा ईटहरी प्रखंड में किसान खेतों की नापी, सीमांकन और पुराने दस्तावेजों की खोज में जुट गए हैं. वर्षों से लंबित भूमि विवादों के समाधान की उम्मीद भी बढ़ी है.

बनमा ईटहरी (सहरसा) से आशीष कुमार सिंह

Land Survey Saharsa: प्रखंड के सहुरिया, घौरदौर, ईटहरी, महारस, सरबेला और जमालनगर पंचायतों में विशेष भूमि सर्वेक्षण कार्य ने अब गति पकड़ ली है. सर्वेक्षण टीमों के गांवों में पहुंचने के साथ ही किसान अपने खेतों की पहचान और सीमांकन को लेकर सक्रिय हो गए हैं. खेतों पर रैयतों की बढ़ती मौजूदगी इस बात का संकेत है कि लोग भूमि अभिलेखों को दुरुस्त कराने और भविष्य के विवादों से बचने के लिए गंभीरता से तैयारी कर रहे हैं.

खेतों में बढ़ी हलचल, सीमांकन को लेकर दिख रही गंभीरता

भूमि सर्वेक्षण शुरू होने के बाद ग्रामीण इलाकों में नई हलचल देखी जा रही है. किसान अपनी जमीन की वास्तविक स्थिति जानने और सीमाओं को स्पष्ट कराने के लिए खेतों पर पहुंच रहे हैं. कई परिवार वर्षों पुराने दस्तावेजों को निकालकर उनकी जांच कर रहे हैं, ताकि सर्वे के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े.

दस्तावेजों के सत्यापन के बाद होगी खानापूरी

सर्वे अमीन रवी रंजन के अनुसार वर्तमान में जमीन पर वास्तविक दखल-कब्जे की स्थिति का सत्यापन किया जा रहा है. इसके बाद रैयतों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ खानापूरी के लिए बुलाया जाएगा. इस प्रक्रिया में खाता संख्या, प्लॉट संख्या और भूमि के क्षेत्रफल का मिलान किया जाएगा. यदि अभिलेखों में कोई त्रुटि पाई जाती है तो उसे नियमानुसार सुधारने का अवसर भी दिया जाएगा.

पुराने कागजातों की तलाश में जुटे लोग

सर्वेक्षण को लेकर ग्रामीणों में उत्साह के साथ कुछ आशंकाएं भी बनी हुई हैं. बड़ी संख्या में किसान पुराने खतियान, लगान रसीद, वंशावली और अन्य राजस्व दस्तावेजों की तलाश कर रहे हैं. लोगों का मानना है कि सही दस्तावेज होने से सर्वे प्रक्रिया आसान होगी और भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की संभावना कम हो जाएगी.

भूमि विवादों के समाधान की बढ़ी उम्मीद

ग्रामीणों का कहना है कि विशेष भूमि सर्वेक्षण पूरा होने के बाद भूमि अभिलेख अद्यतन होंगे और जमीन से जुड़े विवादों में कमी आएगी. प्रशासन ने भी लोगों से सर्वेक्षण कार्य में सहयोग करने और निर्धारित समय पर सभी आवश्यक कागजात उपलब्ध कराने की अपील की है. अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शी और निष्पक्ष सर्वेक्षण से भूमि प्रबंधन व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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