बनमा ईटहरी (सहरसा) से आशीष कुमार सिंह
Land Survey Saharsa: प्रखंड के सहुरिया, घौरदौर, ईटहरी, महारस, सरबेला और जमालनगर पंचायतों में विशेष भूमि सर्वेक्षण कार्य ने अब गति पकड़ ली है. सर्वेक्षण टीमों के गांवों में पहुंचने के साथ ही किसान अपने खेतों की पहचान और सीमांकन को लेकर सक्रिय हो गए हैं. खेतों पर रैयतों की बढ़ती मौजूदगी इस बात का संकेत है कि लोग भूमि अभिलेखों को दुरुस्त कराने और भविष्य के विवादों से बचने के लिए गंभीरता से तैयारी कर रहे हैं.
खेतों में बढ़ी हलचल, सीमांकन को लेकर दिख रही गंभीरता
भूमि सर्वेक्षण शुरू होने के बाद ग्रामीण इलाकों में नई हलचल देखी जा रही है. किसान अपनी जमीन की वास्तविक स्थिति जानने और सीमाओं को स्पष्ट कराने के लिए खेतों पर पहुंच रहे हैं. कई परिवार वर्षों पुराने दस्तावेजों को निकालकर उनकी जांच कर रहे हैं, ताकि सर्वे के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े.
दस्तावेजों के सत्यापन के बाद होगी खानापूरी
सर्वे अमीन रवी रंजन के अनुसार वर्तमान में जमीन पर वास्तविक दखल-कब्जे की स्थिति का सत्यापन किया जा रहा है. इसके बाद रैयतों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ खानापूरी के लिए बुलाया जाएगा. इस प्रक्रिया में खाता संख्या, प्लॉट संख्या और भूमि के क्षेत्रफल का मिलान किया जाएगा. यदि अभिलेखों में कोई त्रुटि पाई जाती है तो उसे नियमानुसार सुधारने का अवसर भी दिया जाएगा.
पुराने कागजातों की तलाश में जुटे लोग
सर्वेक्षण को लेकर ग्रामीणों में उत्साह के साथ कुछ आशंकाएं भी बनी हुई हैं. बड़ी संख्या में किसान पुराने खतियान, लगान रसीद, वंशावली और अन्य राजस्व दस्तावेजों की तलाश कर रहे हैं. लोगों का मानना है कि सही दस्तावेज होने से सर्वे प्रक्रिया आसान होगी और भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की संभावना कम हो जाएगी.
भूमि विवादों के समाधान की बढ़ी उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि विशेष भूमि सर्वेक्षण पूरा होने के बाद भूमि अभिलेख अद्यतन होंगे और जमीन से जुड़े विवादों में कमी आएगी. प्रशासन ने भी लोगों से सर्वेक्षण कार्य में सहयोग करने और निर्धारित समय पर सभी आवश्यक कागजात उपलब्ध कराने की अपील की है. अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शी और निष्पक्ष सर्वेक्षण से भूमि प्रबंधन व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी.
