सहरसा सदर अस्पताल में समाचार संकलन (कवरेज) के दौरान 'प्रभात खबर' के पत्रकार के साथ ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. एस. के. आजाद एवं अस्पताल कर्मियों द्वारा की गई बदसलूकी व मारपीट की घटना ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. इस शर्मनाक घटना को लेकर बिहार राज्य नागरिक परिषद के सदस्य सह प्रदेश जदयू नेता किशोर सिंह ने कड़ा रुख अख्तियार किया है.
जदयू नेता ने इस मामले में सीधे बिहार के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र प्रेषित कर घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी चिकित्सक व दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ तत्काल कठोर दंडात्मक कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है.
'चौथे स्तंभ पर हमला जनहित के खिलाफ': किशोर सिंह
मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को भेजे गए पत्र में जदयू नेता किशोर सिंह ने मीडिया की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर गंभीर चिंता व्यक्त की:
- लोकतंत्र पर कुठाराघात: उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जिसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता को अक्षुण्ण रखना किसी भी लोकतांत्रिक समाज की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.
- अत्याचार पर चिंता: आए दिन निष्पक्ष कवरेज करने वाले मीडियाकर्मियों की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने, उन्हें डराने-धमकाने और उनके साथ शारीरिक हिंसा करने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जो देश, राज्य और समाज के हित में अत्यंत चिंताजनक हैं.
पत्रकार को कमरे में बंद कर मारपीट करने का गंभीर आरोप
जदयू नेता ने अस्पताल परिसर में घटी घटना की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हुए मामले की गंभीरता को रेखांकित किया:
- जनसरोकार उठाने की सजा: प्रेस प्रतिनिधि सदर अस्पताल में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, मरीजों की असुविधाओं और जनसरोकार से जुड़ी जमीनी समस्याओं को उजागर कर शासन व प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराने का दायित्व निभा रहे थे.
- अमानवीय व्यवहार: समाचार संकलन के दौरान ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. एस. के. आजाद और उनके सहयोगियों द्वारा कार्य में व्यवधान पैदा करना, पत्रकार के साथ गाली-गलौज व मारपीट करना और उन्हें कमरे में बंद कर प्रताड़ित करना बेहद संगीन और आपराधिक कृत्य है.
स्वास्थ्य मंत्री से निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई की गुहार
किशोर सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री को अलग से प्रेषित पत्र में स्वास्थ्य विभाग की कार्यसंस्कृति पर सवाल उठाते हुए मांग की:
- दोषियों की जवाबदेही तय हो: सदर अस्पताल की छवि धूमिल करने वाले चिकित्सक एवं संलिप्त स्वास्थ्य कर्मियों को तत्काल प्रभाव से चिन्हित कर विभागीय निलंबन व कानूनी कार्रवाई की जाए.
- पत्रकारों को कार्यस्थल पर सुरक्षा: अस्पतालों और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में कवरेज करने वाले मीडियाकर्मियों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ठोस सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी करे.
