कटिहार से सहरसा पहुंची भाईचारा पदयात्रा: न्यायपालिका में हिंदी के अनिवार्य प्रयोग की उठी मांग, देखें वक्ताओं के विचार

हिंदी की प्रतिष्ठा और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर 'सर्वोदय समाज, कटिहार' द्वारा आयोजित 'एकता, अखंडता, संप्रभुता एवं भाईचारा पदयात्रा' सहरसा पहुंची. इस यात्रा में हिंदी को न्यायपालिका और शासन-प्रशासन में अनिवार्य बनाने की जोरदार वकालत की गई.

हिंदी भाषा की प्रतिष्ठा, संवैधानिक अधिकार तथा सर्वोच्च न्यायालय सहित देश की समस्त न्यायपालिका, शासन-प्रशासन और सार्वजनिक जीवन में हिंदी के अधिकाधिक व अनिवार्य प्रयोग की मांग को लेकर 'सर्वोदय समाज, कटिहार' के नेतृत्व में निकाली गई 'एकता, अखंडता, संप्रभुता एवं भाईचारा पदयात्रा' मंगलवार को सहरसा पहुंची.

सहरसा पहुंचने पर पदयात्रा का औपचारिक शुभारंभ कोशी विकास संघर्ष मोर्चा के संस्थापक अध्यक्ष विनोद कुमार झा एवं संरक्षक प्रवीण आनंद ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर किया. सर्वोदय समाज कटिहार के अध्यक्ष अशोक कुमार के नेतृत्व में पदयात्रियों का जत्था शहर के प्रमुख मार्गों से जनसंवाद करते हुए गुजरा, जिसका समापन ऐतिहासिक महावीर चौक पर किया गया. पदयात्रा के उपरांत महावीर चौक पर एक विशाल नुक्कड़ सभा का आयोजन हुआ.

'हिंदी केवल भाषा नहीं, देश की विविधता को जोड़ने वाली डोर': विनोद कुमार झा

नुक्कड़ सभा को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कोशी विकास संघर्ष मोर्चा के संस्थापक अध्यक्ष विनोद कुमार झा ने कहा:

  • संवैधानिक सम्मान की दरकार: भारत की भाषाई विविधता का आदर करते हुए हिंदी को उसका वास्तविक राष्ट्रीय सम्मान मिलना चाहिए. यह उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक संवाद स्थापित करने वाली सबसे मजबूत कड़ी है.
  • राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से देखने की जरूरत: मोर्चा के संरक्षक प्रवीण आनंद ने कहा कि भाषा के सवाल को किसी संकीर्ण क्षेत्र, जाति, वर्ग या राजनीतिक दल के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए. यह राष्ट्रीय संप्रभुता, अखंडता और संवैधानिक भावनाओं से जुड़ा मसला है. इसके लिए राष्ट्रव्यापी जनजागरण अभियान आवश्यक है.

'न्यायपालिका और शासन से हटे अंग्रेजी का वर्चस्व': अशोक कुमार व मोहन साह

सभा में वक्ताओं ने प्रशासनिक फाइलों और अदालती फैसलों में जनभाषा के उपयोग पर बल दिया:

  • न्याय की भाषा बने लोकभाषा: सर्वोदय समाज के अध्यक्ष अशोक कुमार ने रेखांकित किया कि जब तक देश की अदालतों—विशेषकर उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय—में आम नागरिक की भाषा में बहस और फैसले नहीं होंगे, तब तक लोकतंत्र वास्तविक रूप से जनसुलभ नहीं हो सकता.
  • सामूहिक एकजुटता का आह्वान: प्रख्यात व्यवसायी व सामाजिक नेता मोहन साह ने कहा कि देश की 140 करोड़ जनता पर थोपी गई विदेशी भाषा की मानसिकता से बाहर निकलने का समय आ गया है. शासन, व्यापार और न्याय व्यवस्था में हिंदी को सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए समाज के हर तबके को एकजुट होना होगा.

पदयात्रा और सभा में प्रमुख रूप से रहे शामिल

पदयात्रा में कटिहार और सहरसा दोनों जिलों के सामाजिक कार्यकर्ताओं व बुद्धिजीवियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. कार्यक्रम में रंजीत कुमार विश्वास, दीपक कुमार साह, कुंदन कुमार यादव, अरविंद कुमार, अंगद कुमार, मो. सफीक, रंजीत साह, अनिल झा, अर्जुन तिवारी, हरी लाल, टुनटुन शर्मा, रविंद्र कुमार, राजा कुमार, किशोर कुमार, शैलेंद्र शर्मा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे.

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By Vinay Kumar Mishra

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