Saharsa Guru Purnima Mahotsav: सहरसा के एमएलटी कॉलेज खेल मैदान में आयोजित दो दिवसीय श्रीव्यास गुरु पूर्णिमा महोत्सव के सफल समापन के बाद उत्सव समिति ने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी संत-महात्माओं, प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवकों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं श्रद्धालुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की. समिति ने कहा कि सभी के सहयोग और पूज्य गुरुदेव के आशीर्वाद से महोत्सव शांतिपूर्ण, अनुशासित और ऐतिहासिक रूप से सफल रहा.
60 से 70 हजार श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा
उत्सव समिति के सदस्य ज्योति कुमार सिंह ने बताया कि दो दिवसीय महोत्सव में लगभग 60 से 70 हजार श्रद्धालुओं ने भाग लिया. बड़ी संख्या में श्रद्धालु जिले के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी पहुंचे और गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए.
महाआरती बनी सबसे बड़ा आकर्षण
महोत्सव का सबसे आकर्षक आयोजन संध्या बेला में हुई भव्य महाआरती रही. हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ दीप प्रज्वलित कर आरती में भाग लिया. वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और गुरु वंदना से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा. श्रद्धालुओं ने इसे महोत्सव का सबसे दिव्य और अविस्मरणीय क्षण बताया.
गुरु की महिमा पर स्वामी आगमानंद महाराज का आशीर्वचन
महोत्सव के दौरान जगतगुरु श्री रामचंद्राचार्य परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देते हुए गुरु की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण जैसे अवतारी पुरुषों द्वारा भी गुरु को सर्वोच्च सम्मान दिया जाना इस बात का प्रमाण है कि जीवन में गुरु का स्थान कितना महत्वपूर्ण है.स्वामी जी ने कहा कि गुरु का स्थान संसार में सर्वोच्च है. देवता भी गुरु की पूजा और सम्मान करते हैं. गुरु ही व्यक्ति को अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाने का मार्ग दिखाते हैं. सनातन परंपरा में गुरु की महिमा सदियों से रही है. त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने महर्षि वशिष्ठ एवं महर्षि विश्वामित्र को अपना गुरु माना और उनसे शिक्षा एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया. वहीं द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने महर्षि सांदीपनि मुनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की और 64 दिनों में 64 कलाओं तथा 16 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया.उन्होंने आगे कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि शिष्य को सही मार्ग पर चलने, संस्कारवान बनने और जीवन के उद्देश्य को समझने की प्रेरणा भी देते हैं. उनके आशीर्वचन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे. स्वामी जी ने सभी से गुरु के बताए मार्ग पर चलने और जीवन में सदाचार, सेवा, संस्कार एवं समर्पण अपनाने का आह्वान किया.ये बाते उन्होंने गुरु पूर्णिमा के दिन कहे थे.
देशभर से पहुंचे श्रद्धालु, 56 भोग का आयोजन
महोत्सव में श्रद्धा और भक्ति के साथ 56 भोग लगाया गया. देशभर से परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज के अनुयायी पहुंचे. हजारों श्रद्धालुओं ने गुरुजी का आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रसाद ग्रहण किया.हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बेंगलुरु से विशेष अनुयायी पहुंचे, जिन्होंने फूलों की पंखुड़ियों से सुसज्जित माला गुरुजी के चरणों में अर्पित की. इस दौरान ‘जय गुरुदेव’ के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा.बेंगलुरु के अलावा विशाखापट्टनम, मुंबई, दिल्ली, रांची, लखनऊ, वाराणसी, उत्तराखंड, झारखंड, तमिलनाडु सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और गुरुजी का आशीर्वाद प्राप्त किया.
भंडारा लगातार चलता रहा, नहीं हुई कोई अप्रिय घटना
समिति ने बताया कि सुबह से देर रात तक महाप्रसाद और प्रसाद वितरण का भंडारा निरंतर चलता रहा. पूरे आयोजन के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना या चोरी की शिकायत सामने नहीं आई. समिति ने इसका श्रेय प्रशासन, पुलिस, स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं के अनुशासित सहयोग को दिया.
विशिष्ट अतिथियों और प्रशासन का जताया आभार
उत्सव समिति ने बीएन मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. बिमलेन्दु शेखर झा, पूर्व सांसद आनंद मोहन, शिक्षकोत्तर एमएलसी संजीव कुमार सिंह, पूर्व विधायक शंकर सिंह, एमएलटी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. सुधीर कुमार सिंह, महापौर बैन प्रिया, नगर निगम आयुक्त प्रभात कुमार झा, कोसी प्रक्षेत्र के डीआईजी डॉ. कुमार आशीष तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव संजय कुमार सरोज सहित सभी संत-महात्माओं और विशिष्ट अतिथियों के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया.
स्वयंसेवकों की भूमिका को सराहा
समिति ने प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर निगम, मीडिया प्रतिनिधियों और आयोजन में सेवा देने वाले सभी स्वयंसेवकों के योगदान की भी सराहना की. समिति के सदस्य रामकुमार सिंह, पंडित मनमोहन झा, विप्लव रंजन, अजीत कुमार प्रीतम, सेम्पु सिंह, अन्नु सिंह, अमर किशोर पोद्दार, चुन्ना सिंह, अमित कुमार सिंह, गुड्डू तिवारी, संदीप कुमार पंकज और विनीत सिंह सहित अन्य सदस्यों ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से यह आयोजन जिले के सबसे सफल आध्यात्मिक आयोजनों में शामिल हो गया.
