16 कुंआ का पानी लाकर होता है गणगौर का पूजन

16 कुंआ का पानी लाकर होता है गणगौर का पूजन

मारवाड़ी समाज की कुंआरी कन्या व महिलाओं ने उत्साह से मनाया गणगौर उत्सव सहरसा . राजस्थानी परंपरा के अनुसार मारवाड़ी समाज की कुंआरी कन्या एवं महिलाओं द्वारा गणगौर बङे धूमधाम से मनाया जाता है. होलिका दहन के समय नवविवाहिता चार फेरी होलिका की लगाती है. दूसरी सुबह होली के दिन होलिका दहन की राख से आठ पिंडियां एवं गोबर की आठ पिंडियां बनाकर होली वाले दिन से पुजन शुरू करती है. पांच दिन पूजन करने के बाद बसिया पर्व मनाया जाता है. जो शीतला मैया को जल अर्पण करते हैं. उसी दिन नवविवाहिता एवं कुंवारी लङकियां कुम्हार के पास जाकर मिट्टी लाती है एवं उस मिट्टी से पांच मूर्तियां बनाती है. पांच मूर्तियों में ईशर, गौरां, मालन, रौआं एवं कानीराम बनाती हैं. ईशर को भगवान शिव के रूप में, गौरां मां पार्वती के रूप में पूजी जाती है. होलिका दहन के दूसरे दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल पक्ष तृतीया तक 18 दिनों तक चलने वाला गणगौर त्योहार है. नवविवाहिता पहले साल अपने मायके में ही गणगौर पूजती है. 18 दिन पूजन करने के बाद नवविवाहिता के पति अपने ससुराल आते हैं एवं अपनी पत्नी को विदा करा कर ले जाते हैं. गणगौर पूजन में कन्याएंऔ एवं महिलाएं अपने लिए अखंड सौभाग्य अपने पीहर एवं ससुराल की समृद्धि एवं गणगौर से प्रति वर्ष फिर से आने का आग्रह करती है. 18वें दिन सभी कुंवारी लङकियां, नवविवाहिता एवं सुहागन महिलाएं पूजन में शामिल होती है. अंतिम दिन लङकियां 16 कुंआ का पानी लाकर गणगौर का पूजन करती है. अंतिम दिन सूर्यास्त से पहले नवविवाहिता, लड़कियां एवं सुहागन महिलाएं गणगौर लेकर अपने नजदीक तालाब या पोखर में मूर्तियां विसर्जित करती है. अपने इष्ट मित्रों के साथ अबीर गुलाल लगाकर अपने-अपने घर लौट जाती है. गणगौर पूजा में नम्रता यादुका, सुमन अग्रवाल, गीता गोयल, सुनीता यादुका, अंजली यादुका, रेखा तुलस्यान, प्रीती तुलस्यान, ममता तुलस्यान, प्रिंसी तुलस्यान, बबीता तुलस्यान सहित अन्य लगे रहे.

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By Dipankar Shriwastaw

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