फार्मर आइडी निर्माण को ले जमाबंदी की विसंगतियों से किसान परेशान

प्रखंड क्षेत्र में किसानों का फार्मर आइडी किसान आईडी निर्माण कार्य गांव-गांव घूमकर प्रखंड सह अंचल कर्मियों द्वारा किया जा रहा है.

गांव-गांव घूमकर प्रखंड सह अंचल कर्मी कर रहे काम

सलखुआ. प्रखंड क्षेत्र में किसानों का फार्मर आइडी किसान आईडी निर्माण कार्य गांव-गांव घूमकर प्रखंड सह अंचल कर्मियों द्वारा किया जा रहा है. इस दौरान वरीय अधिकारियों को भी कार्य की निगरानी करते हुए देखा गया. हालांकि जमीनी स्तर पर यह कार्य कई गंभीर समस्याओं से जूझता नजर आ रहा है, जिससे बड़ी संख्या में किसान लाभ से वंचित होने की आशंका जता रहे हैं. किसानों का कहना है कि संयुक्त परिवार की स्थिति में फार्मर आइडी बनाना सबसे बड़ी चुनौती बन गयी है. एक ही जमाबंदी में कई सदस्यों का नाम दर्ज होने के कारण सिस्टम में मिलान नहीं हो पा रहा है. परिणामस्वरूप कर्मियों द्वारा बार-बार मैच नहीं कर रहा है, कहकर आवेदन रोक दिया जा रहा है, जिससे किसानों को निराश लौटना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने यह भी याद दिलाया कि पिछले दो माह पूर्व गांव-गांव में कैंप लगाकर जमाबंदी फूट अलग-अलग नाम से जमाबंदी कराने और कागजात सुधारने की प्रक्रिया चलायी गयी थी. बावजूद इसके जमीनी हकीकत यह है कि आज भी अधिकांश मामलों में जमाबंदी जस की तस पड़ी हुई है.

पहले व्यापक स्तर पर जमाबंदी सुधार व फूट की प्रक्रिया पूरी करने की मांग

किसानों का सवाल है कि जब सरकारी स्तर पर जमाबंदी दुरुस्त नहीं हो सकी तो अब व्यक्तिगत स्तर पर उसे कैसे ठीक कराया जाये. किसानों ने आशंका जतायी कि यदि यही स्थिति बनी रही तो सभी किसानों की फार्मर आईडी बन पाना संभव नहीं होगा. जिससे वे सरकारी योजनाओं, अनुदान और सुविधाओं से वंचित रह जायेंगे. कई किसानों ने बताया कि वे काम-धंधा छोड़कर दूर-दराज से कैंप स्थल तक पहुंचते हैं, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और किसान प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि पहले व्यापक स्तर पर जमाबंदी सुधार व फूट की प्रक्रिया पूरी की जाये, उसके बाद ही फार्मर आइडी निर्माण कार्य कराया जाये. प्रतिनिधियों का कहना है कि बिना जमाबंदी की समस्या सुलझाए यह अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जायेगा. ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि जब तक जमाबंदी की त्रुटियां दूर नहीं की जाती, तब तक फार्मर आइडी निर्माण कार्य को प्रभावी नहीं माना जा सकता. किसानों को वास्तविक लाभ दिलाने के लिए प्रशासन को इस मूल समस्या पर गंभीरता से ध्यान देना होगा.

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By Dipankar Shriwastaw

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