सहरसा: सदर अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) पर उठे सवाल, सालाना 18 लाख खर्च के बाद भी खाली पड़े हैं बेड

सहरसा सदर अस्पताल का पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) अपने सालाना 18 लाख रुपये के भारी-भरकम खर्च के बावजूद सवाल के घेरे में है. आरोप है कि केंद्र में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या के अनुपात में बेड खाली रहते हैं, जिससे सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है.

सहरसा. मॉडल सदर अस्पताल परिसर स्थित एमसीएच भवन में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) के संचालन और वित्तीय व्यय को लेकर सवाल उठने लगे हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के उपचार और पोषण प्रबंधन के लिए संचालित एनआरसी पर प्रतिवर्ष करीब 18 लाख रुपये तक खर्च किए जाते हैं. वहीं केंद्र में भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या अपेक्षाकृत कम रहने की बात सामने आ रही है. ऐसे में सरकारी राशि के उपयोग और केंद्र की प्रभावशीलता को लेकर चर्चा तेज हो गयी है.

कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए संचालित है एनआरसी

पोषण पुनर्वास केंद्र का उद्देश्य गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को अस्पताल आधारित उपचार, विशेष पोषण आहार, स्वास्थ्य जांच और आवश्यक परामर्श उपलब्ध कराना है. जिले के विभिन्न प्रखंडों में चिन्हित गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को स्वास्थ्य विभाग, आशा और आंगनबाड़ी के माध्यम से एनआरसी में रेफर कर भर्ती कराया जाना चाहिए. हालांकि स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि वर्ष के अधिकांश समय केंद्र के कई बेड खाली रहते हैं और अपेक्षित संख्या में बच्चों का नामांकन नहीं हो पाता है. यदि ऐसा है तो कुपोषित बच्चों की पहचान और रेफरल व्यवस्था की प्रभावशीलता की भी समीक्षा जरूरी हो जाती है.

18 लाख के खर्च के अनुपात में लाभार्थियों की संख्या पर सवाल

सूत्रों के अनुसार यदि एनआरसी में भर्ती बच्चों की संख्या सीमित है तो यह जांच का विषय है कि केंद्र के संचालन के लिए उपलब्ध करायी जा रही राशि का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है. एनआरसी के संचालन में भोजन, पोषण सामग्री, दवा, मानव संसाधन, रखरखाव, प्रशिक्षण और अन्य प्रशासनिक मद में खर्च होने की बात कही जाती है.

ऐसे में वास्तविक लाभार्थियों की संख्या के अनुपात में किए जा रहे खर्च की स्थिति स्पष्ट करने के लिए वित्तीय अभिलेखों और केंद्र के संचालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग उठ रही है.

कई वर्षों के खर्च का लेखा-जोखा सार्वजनिक करने की मांग

मामले को लेकर मांग की जा रही है कि पिछले कई वित्तीय वर्षों में एनआरसी को प्राप्त राशि, उसकी निकासी, भुगतान और खर्च का विस्तृत लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए. इसके साथ ही भर्ती बच्चों की वास्तविक संख्या, रेफरल रिकॉर्ड, उपस्थिति पंजी, पोषण सामग्री की खरीद, भोजन आपूर्ति और भुगतान से संबंधित अभिलेखों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की जा रही है.

रेफरल व्यवस्था की भी हो समीक्षा

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि जिले में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान और एनआरसी तक उनका रेफरल प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा है तो यह भी समीक्षा का विषय है. एनआरसी का मूल उद्देश्य गंभीर कुपोषित बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य और पोषण सेवाएं उपलब्ध कराना है. ऐसे में केंद्र की उपयोगिता, बेड ऑक्यूपेंसी और रेफरल व्यवस्था का नियमित मूल्यांकन किया जाना आवश्यक माना जा रहा है.

अस्पताल प्रबंधन से जुड़े अभिलेखों की जांच की मांग

मामले में अस्पताल प्रबंधक सिंपी कुमारी और सिविल सर्जन डॉ राज नारायण प्रसाद के प्रशासनिक स्तर पर लिए गए निर्णयों तथा उनके अधीन एनआरसी के संचालन से जुड़े अभिलेखों की जांच कराने की मांग भी उठ रही है. हालांकि किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध वित्तीय अनियमितता या गड़बड़ी का अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले नहीं निकाला जा सकता. अभिलेखों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि एनआरसी के संचालन में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन हुआ है या नहीं.

विशेष ऑडिट से साफ हो सकती है स्थिति

जानकारों के अनुसार यदि एनआरसी में वास्तविक रूप से कम बच्चे भर्ती हो रहे हैं और इसके बावजूद नियमित रूप से लाखों रुपये का खर्च हो रहा है तो पूरे मामले की विशेष ऑडिट करायी जानी चाहिए. जांच में वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए. वहीं यदि सभी खर्च नियमों के अनुरूप पाए जाते हैं तो इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि एनआरसी के संचालन और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके.

क्या है एनआरसी

पोषण पुनर्वास केंद्र यानी न्यूट्रीशन रिहैबिलिटेशन सेंटर गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के उपचार और पोषण प्रबंधन के लिए संचालित विशेष स्वास्थ्य केंद्र है. यहां छह माह से पांच वर्ष तक के ऐसे बच्चों को भर्ती किया जाता है, जिनमें गंभीर कुपोषण के लक्षण पाए जाते हैं.

केंद्र में भर्ती बच्चों को चिकित्सकीय निगरानी में विशेष पोषण आहार, दवा, स्वास्थ्य जांच और परामर्श की सुविधा दी जाती है. इसका उद्देश्य बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति, वजन और पोषण स्तर में सुधार करना तथा अभिभावकों को उचित खानपान और देखभाल के प्रति जागरूक करना है.

उपचार के बाद फॉलोअप भी जरूरी

एनआरसी में बच्चों को भर्ती कराने के लिए आशा, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान और रेफरल किया जाता है. उपचार अवधि पूरी होने के बाद बच्चों का नियमित फॉलोअप भी किया जाता है, ताकि कुपोषण की समस्या दोबारा उत्पन्न न हो.

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लेखक के बारे में

By अंजन आर्यन सिंह

पत्रकारिता में 14 वर्षों का अनुभव. अब तक लगातार सहरसा से क्राइम और स्वास्थ्य की खबरें संकलित करता हूं.

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