रोहिणी नक्षत्र के प्रवेश से किसानों में बढ़ी उम्मीद, धान की नर्सरी की तैयारी तेज

अच्छी बारिश और बेहतर उपज की आस में जुटे किसान, अनुदानित बीजों की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल

अच्छी बारिश और बेहतर उपज की आस में जुटे किसान, अनुदानित बीजों की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल पतरघट: भारतीय कृषि परंपरा में रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व माना जाता है. सोमवार की मध्यरात्रि से रोहिणी नक्षत्र के प्रवेश के साथ ही क्षेत्र के किसानों में अच्छी वर्षा और बेहतर फसल की उम्मीदें बढ़ गई हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में मान्यता है कि रोहिणी नक्षत्र के आगमन के साथ मौसम का मिजाज बदलता है और पर्याप्त बारिश की संभावना बढ़ जाती है, जिससे खरीफ फसलों की तैयारी को गति मिलती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार रोहिणी नक्षत्र के दौरान खेतों की जुताई, धान की नर्सरी तैयार करना तथा मक्का, अरहर सहित अन्य खरीफ फसलों की बुआई की तैयारी करना लाभदायक माना जाता है. इस अवधि में होने वाली वर्षा खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखने में सहायक होती है, जिससे फसलों की बेहतर पैदावार की संभावना बढ़ जाती है. ग्रामीण किसानों का कहना है कि रोहिणी नक्षत्र को लेकर वर्षों पुरानी मान्यताएं आज भी प्रासंगिक हैं. बुजुर्ग किसानों के अनुसार यदि रोहिणी नक्षत्र में समय पर अच्छी बारिश हो जाए, तो पूरे कृषि सत्र में फसलों की स्थिति बेहतर रहती है और किसानों को आर्थिक लाभ मिलता है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को मौसम के अनुरूप खेतों की तैयारी शुरू करने तथा समय रहते बीज और उर्वरकों की व्यवस्था कर लेने की सलाह दी है. साथ ही जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की अपील की है, ताकि कम वर्षा की स्थिति में भी फसलों को अधिक नुकसान न हो. रोहिणी नक्षत्र के प्रवेश के साथ ही क्षेत्र के किसान धान का बिचड़ा गिराने और खेतों की तैयारी में जुट गए हैं. हालांकि कृषि विभाग द्वारा उन्नत एवं हाइब्रिड धान बीजों पर अनुदान दिया जा रहा है, लेकिन कई किसानों का इन बीजों पर भरोसा कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है. किसानों का आरोप है कि पूर्व में उपलब्ध कराए गए अनुदानित गेहूं बीजों का अंकुरण अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुआ, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. प्रभावित किसान मामले की जांच और क्षतिपूर्ति की मांग को लेकर किसान सलाहकार, कृषि समन्वयक, प्रखंड कृषि पदाधिकारी तथा जिला कृषि पदाधिकारी के कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं. किसानों का कहना है कि अब तक न तो मामले की निष्पक्ष जांच हुई है और न ही किसी प्रकार की राहत प्रदान की गई है. इसके कारण क्षेत्र के कई किसानों का रुझान अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाइब्रिड बीजों की ओर बढ़ने लगा है. ऐसे में किसानों का मानना है कि अनुदानित बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना कृषि विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए, ताकि किसानों का भरोसा फिर से बहाल हो सके.

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