नवहट्टा, सहरसा से राजेश डेनजिल, . प्रखंड क्षेत्र में प्रस्तावित डिग्री कॉलेज की स्थापना को लेकर छिड़ा विवाद अब गहराता जा रहा है. कॉलेज के स्थान चयन को लेकर स्थानीय लोग दो गुटों में बंट गए हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने नवहट्टा मुख्यालय और कासिमपुर का स्थलीय निरीक्षण किया ताकि सुविधाओं और भूमि की उपलब्धता का निष्पक्ष आकलन किया जा सके.
मुख्यालय बनाम कासिमपुर: आंदोलन की राह पर ग्रामीण
सरकार की योजना के तहत नवहट्टा प्रखंड में डिग्री कॉलेज का निर्माण होना है. कासिमपुर में पूर्व से ही कुछ शैक्षणिक गतिविधियों और प्रधानाचार्य के योगदान के कारण वहां के ग्रामीण कॉलेज निर्माण को वहीं रखने की मांग कर रहे हैं. इसके विपरीत, नवहट्टा मुख्यालय और आसपास के लोगों का तर्क है कि मुख्यालय में कॉलेज होने से पूरे प्रखंड के छात्रों को सुलभ परिवहन और सुरक्षा मिलेगी. दोनों ही पक्षों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है, जिससे इलाके में प्रशासनिक सरगर्मी बढ़ गई है.
डीएम ने किया भूमि और सुविधाओं का आकलन
जिलाधिकारी ने प्रखंड मुख्यालय स्थित राज्य संपोषित उच्च विद्यालय मैदान और कासिमपुर उच्च विद्यालय परिसर का बारीकी से जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया:
- भूमि की उपलब्धता: कॉलेज भवन के लिए आवश्यक सरकारी जमीन का रकबा.
- सुलभता: छात्रों के आने-जाने के लिए परिवहन के साधनों की स्थिति.
- सामाजिक समरसता: विवाद को खत्म कर आपसी सौहार्द बनाए रखने की संभावना.
बेहतर सुविधाओं वाले स्थान पर ही बनेगा कॉलेज
निरीक्षण के पश्चात जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कॉलेज के स्थान का चयन केवल भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि तकनीकी रिपोर्ट और छात्र हित में किया जाएगा. उन्होंने अंचल अधिकारी और शिक्षा विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. डीएम ने लोगों से अपील की कि वे आपसी सौहार्द न बिगाड़ें और आंदोलन का रास्ता न चुनें. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जहां सबसे बेहतर और सुलभ व्यवस्था होगी, वहीं कॉलेज का निर्माण कराया जाएगा. मौके पर उप विकास आयुक्त, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी आशीष कुमार सहित कई गणमान्य नागरिक और बुद्धिजीवी उपस्थित थे.
