सहरसा: आगामी जनगणना में मातृभाषा के रूप में 'मैथिली' दर्ज कराने की उठी मांग, चेतना समिति की बैठक में जुटे दिग्गज

सहरसा में आगामी राष्ट्रीय जनगणना में मैथिली को मातृभाषा के रूप में दर्ज कराने के लिए एक बड़ा जन-अभियान शुरू किया गया है. बुद्धिजीवियों, नेताओं और आम जनता ने एकजुट होकर अपनी भाषाई अस्मिता को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने का संकल्प लिया है. इस अभियान का लक्ष्य 15 साल बाद मिले इस अवसर का पूरा लाभ उठाकर शत-प्रतिशत मैथिली भाषियों का पंजीकरण सुनिश्चित करना है.

आगामी राष्ट्रीय जनगणना में मिथिलांचल के लोगों द्वारा अपनी मातृभाषा के रूप में 'मैथिली' दर्ज कराने को लेकर सहरसा में एक बड़ा जन-अभियान शुरू किया गया है. 'चेतना समिति' के तत्वावधान में गंगजला स्थित देव रिसोर्ट के सभागार में प्रख्यात भाषाविद् प्रो. डॉ. कुलानंद झा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय विमर्श बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों, पूर्व मंत्रियों, साहित्यकारों, प्रशासनिक अधिकारियों और बुद्धिजीवियों ने एक सुर में आह्वान किया कि आगामी जनगणना में प्रत्येक नागरिक अपनी मातृभाषा के कॉलम में गर्व से मैथिली दर्ज कराए, ताकि मैथिली भाषियों की वास्तविक और आधिकारिक संख्या राष्ट्रीय पटल पर स्थापित हो सके.

"मैथिली किसी खास जाति की नहीं, पूरे मिथिला की भाषा": महिषी विधायक

बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ताओं ने सामाजिक समरसता और भाषाई अस्मिता पर जोर दिया:

  • डॉ. गौतम कृष्ण (विधायक, महिषी):
    "मैथिली मिथिला क्षेत्र में रहने वाले सभी जाति, वर्ग और धर्म के लोगों की साझी भाषा है. आगामी जनगणना में प्रत्येक व्यक्ति का यह पुनीत कर्तव्य है कि वह बिना किसी संकोच के अपनी मातृभाषा मैथिली अंकित कराए."
  • आलोक रंजन झा (पूर्व मंत्री, बिहार सरकार):
    "मां, मातृभूमि और मातृभाषा का सम्मान ही एक सभ्य समाज की पहचान है. चेतना समिति का यह प्रयास सराहनीय है और इस महाभियान को जन-जन तक पहुंचाने में हम हरसंभव सहयोग देंगे."
  • धनिक लाल मुखिया (प्रदेश महासचिव, राजद):
    "कुछ असामाजिक तत्व यह भ्रम फैलाते हैं कि मैथिली किसी विशेष वर्ग की भाषा है, जबकि वास्तविकता यह है कि मिथिला की माटी से जुड़े हर इंसान की पहचान मैथिली से है."

15 साल बाद मिला अवसर, शत-प्रतिशत पंजीकरण का लक्ष्य

बैठक में विषय प्रवेश कराते हुए चेतना समिति के उपाध्यक्ष उमेश मिश्र और सचिव जयदेव मिश्र ने अभियान की रूपरेखा रखी:

  • ऐतिहासिक अवसर: वक्ताओं ने कहा कि करीब 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जनगणना का अवसर आया है. ऐसे में जागरूकता की कमी से एक भी मैथिली भाषी छूटने न पाए.
  • साहित्यिक उर्वरा भूमि: कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. डॉ. कुलानंद झा एवं समिति अध्यक्ष विवेकानंद ने कहा कि सहरसा मैथिली आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां बोली जाने वाली भाषा ही ठेठ व वास्तविक मैथिली का मानक तय करती है.
  • दैनिक जीवन में उपयोग: नगर निगम की महापौर बैन प्रिया ने दैनिक बोलचाल और औपचारिक संवाद में भी मैथिली को प्राथमिकता देने की अपील की.

सूत्रधार प्रभात रंजन सम्मानित, बुद्धिजीवियों ने दिए सुझाव

कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने और आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रभात रंजन को शॉल व पाग से विशेष रूप से सम्मानित किया गया.

प्रमुख रूप से उपस्थित गणमान्य व प्रतिनिधि:

बनगांव के पूर्व मुखिया भगवान झा, भोगेंद्र शर्मा, संजय वशिष्ठ, पूर्व आईएएस श्यामल कुमार पाठक, प्रभाकरण देव, मिथिला स्टूडेंट यूनियन के अंशु मिश्रा, मुखिया राहुल कुमार झा, मुखिया अविनाश कुमार, बौआ खां, साहित्यकार मुख्तार आलम, निक्की प्रियदर्शिनी, जवाहर ठाकुर, कौशल माधव, दिलीप कुमार चौधरी, पारस कुमार झा, संजय मिश्रा, तरुण झा, डब्बू मिश्र, शैलेश झा, रघुवंश झा, मृत्युंजय झा, पंकज ठाकुर, बिजली प्रकाश, अवधेश कुमार झा, अवध कुमार, आशीष सिंह विक्रमादित्य, दीपनारायण ठाकुर, डॉ. रमण झा, डॉ. अक्षय चौधरी, रणविजय झा, पुनीत आनंद, रौशन माधव, आनंद झा, बिपिन झा राजा, रौशन आजाद, अंशु झा, विवेकानंद ठाकुर, विप्रेन्द्र झा माधव, शिशिर चंद्र मिश्र, प्रियंका मिश्र, प्रशांत कुमार मिश्र एवं जितेंद्र मिश्र सहित दर्जनों प्रबुद्धजन उपस्थित रहे. अंत में संयोजक दिनेश चंद्र झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया.


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By Vinay Kumar Mishra

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