मां-बाप को खोया, भाई-बहनों की जिम्मेदारी संभाली, अब टाटा स्टील में इंजीनियर ट्रेनी बनीं खुशी कुमारी

Bihar Success Story: सहरसा में रहने वाली खुशी कुमारी का चयन टाटा स्टील में इंजीनियर ट्रेनी के पद पर हुआ है. माता-पिता के निधन के बाद भाई-बहनों की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने यह सफलता हासिल की.

सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट

Bihar Success Story: हर सफलता के पीछे एक कहानी होती है. लेकिन कुछ कहानियां सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि हिम्मत, जिम्मेदारी और उम्मीद की भी होती हैं. खुशी कुमारी की कहानी ऐसी ही है. माता-पिता के असमय निधन के बाद उन्होंने न सिर्फ अपने छोटे भाई-बहनों का सहारा बनने का फैसला किया, बल्कि अपने सपनों को भी टूटने नहीं दिया. आज उनकी यही जिद हजारों युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है.

संघर्ष के बीच हासिल की बड़ी सफलता

सहरसा में रहने वाली और मूल रूप से सुपौल जिले के गढ़ बरुआरी गांव की निवासी खुशी कुमारी का चयन देश की अग्रणी स्टील कंपनी टाटा स्टील में इंजीनियर ट्रेनी के पद पर हुआ है.

वह दरभंगा अभियंत्रण महाविद्यालय में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की छात्रा हैं. उनकी इस उपलब्धि पर बिहार सरकार के विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने आधिकारिक रूप से बधाई दी है. विभाग का संदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के माध्यम से भी साझा किया गया.

जब जिंदगी ने सबसे कठिन परीक्षा ली

खुशी कुमारी का सफर आसान नहीं रहा. वर्ष 2018 में उनकी मां का निधन हो गया. इसके बाद नवंबर 2024 में उनके पिता कन्हैया कुमार सिंह, जो बिहार पुलिस में अवर निरीक्षक के पद पर कार्यरत थे, का सहरसा में पदस्थापन के दौरान निधन हो गया.

माता-पिता के असमय निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी खुशी के कंधों पर आ गई. लेकिन उन्होंने हालात के सामने घुटने टेकने के बजाय अपने छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी निभाते हुए पढ़ाई जारी रखी.

Bihar Success Story: भाई-बहनों का सहारा बनीं खुशी

वर्तमान में खुशी का छोटा भाई आदित्य सिंह पूर्णिया के विद्या विहार स्कूल में दसवीं कक्षा का छात्र है, जबकि उनकी छोटी बहन श्रुति कुमारी इंटर कला की पढ़ाई कर रही हैं.

पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद खुशी ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया. लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने टाटा स्टील जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में जगह बनाई.

परिजनों का मिला साथ

इस कठिन दौर में खुशी को अपने मामा संतोष कुमार सिंह और फूफा मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह का पूरा सहयोग मिला. परिवार के इस साथ ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का हौसला दिया.

खुशी का मानना है कि कठिन परिस्थितियां इंसान को रोकती नहीं हैं, बल्कि मजबूत बनाती हैं, यदि वह अपने लक्ष्य पर अडिग रहे.

बिहार सरकार और कॉलेज ने दी बधाई

खुशी की उपलब्धि पर बिहार सरकार के विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं.

दरभंगा अभियंत्रण महाविद्यालय के प्राचार्य और शिक्षकों ने भी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए इसे संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया.

इलाके में खुशी की लहर

खुशी कुमारी वर्तमान में सहरसा नगर निगम के शिवपुरी वार्ड-17 में रहती हैं. उनकी सफलता की खबर मिलते ही इलाके में खुशी का माहौल है.

शिक्षक नेता शिवेंद्र नारायण सिंह, एसबीआई के वरिष्ठ कैश प्रभारी अमित कुमार, व्याख्याता शंकर कुमार, प्रभाकरण देव, कांग्रेस पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष रंजन कुमार, सेवानिवृत्त एएओ अरुण ठाकुर, अधिवक्ता नित्यानंद ठाकुर, सेवानिवृत्त अवर निरीक्षक नारायण प्रसाद सिंह, कर्तव्य फाउंडेशन की ट्रस्टी बबीता सिंह और कई अन्य लोगों ने उन्हें बधाई दी.

बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

खुशी कुमारी की सफलता केवल एक नौकरी मिलने की कहानी नहीं है. यह इस बात का उदाहरण है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अगर हौसला और मेहनत साथ हो तो मंजिल जरूर मिलती है.

उनकी यह उपलब्धि बिहार के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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