सहरसा का बाबा मटेश्वर धाम: जहां स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन को सावन में उमड़ते हैं हजारों श्रद्धालु

Baba Mateshwar Dham : सहरसा जिले का बाबा मटेश्वर धाम श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहाँ स्वयंभू शिवलिंग की मान्यता सदियों से चली आ रही है, जहाँ भक्त सच्चे मन से मांगी गई मुरादें पूरी होने की कामना करते हैं. सावन और महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से यहाँ भक्तों का ताँता लगा रहता है.

Baba Mateshwar Dham : सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड क्षेत्र के काठो गांव स्थित बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गयी पूजा और प्रार्थना बाबा मटेश्वरनाथ तक जरूर पहुंचती है और भक्तों की मनोकामना पूरी होती है. इसी विश्वास के कारण आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज क्षेत्रों से भी श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं. सावन और महाशिवरात्रि के दौरान मंदिर का नजारा विशेष रूप से भक्तिमय हो जाता है.

स्वयंभू शिवलिंग की मान्यता, सदियों से जारी पूजा

स्थानीय लोगों के अनुसार बाबा मटेश्वर धाम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राचीनता और लोकविश्वास है. मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू स्वरूप में प्रकट हुआ था. इसके बाद से ही मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना लगातार चली आ रही है. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है.

सावन में गंगाजल लेकर पहुंचते हैं हजारों शिवभक्त

सावन माह में बाबा मटेश्वर धाम में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. मुंगेर जिले के छर्रापट्टी से भी शिवभक्त गंगाजल लेकर सावन भर यहां पहुंचते हैं और बाबा का जलाभिषेक करते हैं. यह सिलसिला पूरे सावन महीने चलता है. कांवरियों और श्रद्धालुओं के पहुंचने से मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंजता रहता है.

महाशिवरात्रि पर दो दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन

महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. इस दौरान कला संस्कृति विभाग की ओर से दो दिवसीय भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है. मंदिर परिसर में पूजा-पाठ, रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का दौर सुबह से देर रात तक चलता है. विशेष अवसरों पर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा का विशेष श्रृंगार और पूजन किया जाता है.

मनोकामना पूरी होने पर चढ़ाते हैं बेलपत्र और धतूरा

बाबा मटेश्वरनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था इतनी गहरी है कि मनोकामना पूरी होने के बाद कई भक्त दोबारा मंदिर पहुंचकर बेलपत्र, धतूरा और विशेष प्रसाद अर्पित करते हैं. शाम की आरती में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु शामिल होते हैं. भक्तों का मानना है कि बाबा के दरबार में सच्चे मन से की गयी प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती.

धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर बन रही पहचान

स्थानीय लोगों के अनुसार बाबा मटेश्वर धाम अब धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के साथ ग्रामीण जीवन, स्थानीय संस्कृति और शांत आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव मिलता है. मंदिर परिसर में सुविधाओं के विकास और व्यवस्थाओं में सुधार के साथ श्रद्धालुओं की संख्या में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है.

आस्था का ऐसा दरबार जहां खाली हाथ नहीं लौटते भक्त

बाबा मटेश्वर धाम को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था है. भक्तों का विश्वास है कि बाबा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गयी मुराद पूरी होती है. यही लोकविश्वास इस प्राचीन शिवधाम को सहरसा ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष बनाता है.


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By Vinay Kumar Mishra

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