सहरसा जिले के महिषी प्रखंड स्थित प्रसिद्ध संत शिरोमणि बाबा कारू मंदिर की व्यवस्था और प्रबंधन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. मंदिर की न्यास समिति को कथित रूप से निरस्त कर निजी एकाधिकार जमाने, दान पेटी की राशि में हेराफेरी करने, स्थानीय दुकानदारों से अवैध वसूली और श्रद्धालुओं से बैरियर के नाम पर जबरन पैसे लेने के आरोपों को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. मंगलवार को मंदिर के पूर्व महंत उपेंद्र खिरहर की अध्यक्षता में क्षेत्र के विभिन्न गांवों के लोगों की एक बड़ी बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस कथित मनमानी के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का शंखनाद किया गया.
सार्वजनिक आस्था के केंद्र पर निजी कब्जे का गंभीर आरोप
बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व महंत उपेंद्र खिरहर और वक्ताओं ने मंदिर के इतिहास और नियमों को सामने रखा:
- जनसहयोग से बना मंदिर: वक्ताओं ने कहा कि बाबा कारू मंदिर की सेवा-पूजा और संचालन में वर्षों से पूरे इलाके की सहभागिता रही है. जनता के चंदे और दान पेटी के सहयोग से ही मंदिर का भव्य निर्माण संभव हुआ है.
- न्यास समिति के प्रावधान की अनदेखी: बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के नियमों के तहत मंदिर संचालन के लिए विधिवत न्यास समिति गठित थी.
- निजी संपत्ति बनाने का आरोप: आरोप लगाया गया कि स्थानीय ग्रामीण निरंजन खिरहर और उनके परिजनों द्वारा मंदिर को अपनी निजी संपत्ति बताते हुए इस पर जबरन एकाधिकार जमा लिया गया है.
फर्जी स्वीकृति पत्र और बैंक खाते में बंदरबांट
ग्रामीणों ने मंदिर के वित्तीय प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं:
- दान राशि की हेराफेरी: आरोप है कि कथित तौर पर फर्जी स्वीकृति पत्र तैयार कर मंदिर के बैंक खाते में जमा सार्वजनिक दान की राशि का बड़े पैमाने पर बंदरबांट किया गया है.
- दुकानदारों व श्रद्धालुओं से वसूली: मंदिर परिसर के आसपास दुकान लगाने वाले छोटे व्यापारियों से नियमित अवैध वसूली और दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं से बैरियर लगाकर अवैध रूप से पैसे वसूले जा रहे हैं, जिससे मंदिर की साख पर बट्टा लग रहा है.
महापंचायत में आंदोलन की रणनीति तैयार, सैकड़ों लोग रहे मौजूद
मंदिर की गरिमा और पारदर्शी व्यवस्था बहाल करने के लिए ग्रामीणों ने एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई लड़ने का फैसला किया है:
- प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग: बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि धार्मिक न्यास परिषद और जिला प्रशासन के संज्ञान में पूरा मामला लाकर अवैध कब्जे को हटाया जाएगा, अन्यथा उग्र आंदोलन किया जाएगा.
- प्रमुख लोगों की मौजूदगी: इस महत्वपूर्ण बैठक में महिषी दक्षिणी पंचायत के पूर्व मुखिया नरेश यादव, नहरवार मुखिया प्रतिनिधि नंदन कुमार, विजय यादव, पूर्व सरपंच ब्रज मोहन सिंह समेत आसपास के दर्जनों गांवों के सैकड़ों ग्रामीण और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे.
