निजी अस्पताल में युवक की मौत पर आक्रोश, पांच घंटे तक किया हंगामा
सदर थाना क्षेत्र के पूरब बाजार स्थित राइस मिल के समीप एक निजी अस्पताल में भर्ती 30 वर्षीय युवक की मौत के बाद बुधवार को परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा.
इलाज में लापरवाही व ऑक्सीजन प्रबंधन में गड़बड़ी का आरोप, दवा काउंटर का शीशा तोड़ा
सहरसा. सदर थाना क्षेत्र के पूरब बाजार स्थित राइस मिल के समीप एक निजी अस्पताल में भर्ती 30 वर्षीय युवक की मौत के बाद बुधवार को परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा. गुस्साए लोगों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया तथा दवा काउंटर का शीशा तोड़ दिया. करीब पांच घंटे तक अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही. हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी. मृतक की पहचान महिषी थाना क्षेत्र स्थित उग्रतारा मंदिर के समीप निवासी सोनू कुमार झा उर्फ बाल कृष्ण झा के रूप में हुई है. परिजनों के अनुसार सात दिन पूर्व एक बुजुर्ग को बचाने के दौरान हुई सड़क दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गये थे. प्रारंभिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
दूसरे अस्पताल भेजने के बाद किया मृत घोषित
परिजनों का आरोप है कि बुधवार सुबह युवक की तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने उसे गांधीपथ स्थित सूर्या अस्पताल भेज दिया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इसके बाद परिजन शव लेकर वापस निजी अस्पताल पहुंचे और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया. परिजनों का कहना है कि मरीज की मौत पहले ही हो चुकी थी, लेकिन जिम्मेदारी से बचने के लिए उसे दूसरे अस्पताल भेजा गया.
चार लाख रुपये खर्च, फिर भी नहीं बची जान
मृतक के भाई ने बताया कि अस्पताल में सात दिनों तक इलाज चला और इस दौरान चार लाख रुपये से अधिक खर्च हुए. इसके बावजूद मरीज की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ. परिजनों के अनुसार एक दिन पहले तक चिकित्सक मरीज के जल्द स्वस्थ होने की बात कह रहे थे तथा मरीज सामान्य रूप से बातचीत भी कर रहा था. मृतक की बहन ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मरीज को दी जा रही ऑक्सीजन समय से पहले हटा दी गयी थी. पूछने पर बताया गया कि ऑक्सीजन सिस्टम में तकनीकी खराबी आ गयी है. परिजनों का आरोप है कि ऑक्सीजन आपूर्ति बाधित होने के कारण ही मरीज की मौत हुई. हंगामे के दौरान मृतक की मामी कई बार बेहोश हो गयी, जिन्हें स्थानीय लोगों ने संभाला. अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा.
कई थानों की पुलिस पहुंची, अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही सदर थानाध्यक्ष अजय कुमार पासवान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वरीय अधिकारियों को सूचना दी गयी, जिसके बाद कई थानों की पुलिस एवं अतिरिक्त बल की तैनाती की गयी. बाद में मुख्यालय डीएसपी धीरेंद्र पांडेय एवं केपी सिंह भी मौके पर पहुंचे. उनके निर्देश पर सदर एसडीओ श्रेयांस तिवारी, सिविल सर्जन डॉ राज नारायण प्रसाद, डीपीएम विनय रंजन समेत अन्य अधिकारी अस्पताल पहुंचे. अधिकारियों ने अस्पताल के चिकित्सक से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन चिकित्सक मौके पर नहीं पहुंचे. इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने परिजनों से पूरे मामले की जानकारी ली.
निष्पक्ष पोस्टमार्टम कराने का निर्देश
सदर एसडीओ श्रेयांस तिवारी ने सिविल सर्जन को शव का निष्पक्ष पोस्टमार्टम कराकर मौत के कारणों की रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. अस्पताल द्वारा मृत्यु से संबंधित दस्तावेज एवं डिस्चार्ज स्लिप उपलब्ध नहीं कराये जाने पर परिजनों को जिलाधिकारी के नाम आवेदन देकर पोस्टमार्टम कराने की सलाह दी गयी. मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन, चिकित्सकों एवं कर्मियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई एवं न्याय की मांग की है. पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है.
मेडिकल बोर्ड की जांच से खुलेगा मौत का राज : एसडीपीओ
सदर एसडीपीओ आलोक कुमार ने बताया कि सोनू कुमार झा 28 मई से अस्पताल में भर्ती थे और बुधवार सुबह उनकी मृत्यु हो गयी. परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया है. मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. परिजनों द्वारा जिलाधिकारी को आवेदन दिया गया है, जिसके आधार पर मेडिकल बोर्ड का गठन किया जायेगा. मेडिकल बोर्ड की जांच एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा. वहीं अस्पताल में तोड़फोड़ को लेकर प्राप्त आवेदन के आलोक में विधिसम्मत कार्रवाई की जायेगी.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगी स्थिति स्पष्ट : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ राज नारायण प्रसाद ने बताया कि मृतक को सिर में गंभीर चोट लगी थी तथा उपलब्ध जांच रिपोर्ट में शरीर की कई हड्डियों में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है. फिलहाल मौत के कारणों पर कुछ भी स्पष्ट रूप से कहना संभव नहीं है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण सामने आयेगा. उन्होंने कहा कि परिजनों द्वारा लगाये गये आरोपों की भी जांच की जायेगी. साथ ही अस्पताल के निबंधन, संसाधनों एवं अन्य मानकों की भी जांच करायी जायेगी. रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी.