पेयजल के लिए मच सकता है हाहाकार
शहर के किसी भी मोहल्ले में नहीं शुरू हुई पेयजल आपूर्ति
सहरसा : जेठ की गरमी में जिले के लोगों के हलक सूखने लगे हैं. जिला प्रशासन, नगर परिषद व पीएचइडी के लाख दावों के बाद भी शहर के कई मोहल्लों एवं कई प्रखंडों में पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो सकी है. शहर के कई मोहल्लों में पानी की आपूर्ति शुरू ही नहीं हो सकी है. ग्रामीण इलाकों में नल से गंदा पानी गिरता है. शहर के पुरानी जेल व अस्पताल कॉलोनी जलापूर्ति केंद्र से ससमय जलापूर्ति का दावा फेल हो चुका है. खासबात यह है
कि बीते दस वर्ष के दौरान शहरी क्षेत्र में नगर परिषद, विधायक, विधान पार्षद मद से हजारों की तादाद में सार्वजनिक जगहों पर चापानल लगाये जाने की कवायद की गयी है. लेकिन सड़कों पर चापानल का नदारद होना वर्तमान व्यवस्था की पोल खोल रहा है. ज्ञात हो कि शहर के थाना चौक से शंकर चौक के बीच सार्वजनिक चापानल व प्याऊ का नहीं होना गरमी की दोपहरी में लोगों को काफी खटक रहा है. नतीजतन संपन्न लोग बोतलबंद पानी का सेवन कर रहे है वहीं गरीब लोगों के हलक सुखते रहते है.
शहर में पेयजल किल्लत के कारण: जिले के पेयजल में आयरन की मात्रा अधिकांश जगहों पर मिलने की वजह से लोगों का रुझान आरओ वॉटर की तरह होने लगा है. बाजार में कही भी सार्वजनिक जगहों पर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना होता है. मजबूरी में लोगों को अशुद्ध जल से प्यास बुझानी पड़ती है. जलापूर्ति योजना शुरू होने से प्रत्येक वार्ड के दो सार्वजनिक जगहों पर जलापूर्ति के लिए स्टैंड पोस्ट की व्यवस्था की गयी है.
देखरेख का है अभाव: सरकार की ओर से लगाये गये हैण्डपंप यूं ही नहीं खराब हो रहे है, बल्कि इसकी देखरेख नहीं की जा रही है. जबकि समय-समय पर इन हैंडपंपों की मरम्मत के लिए सरकार लाखों रुपये आवंटित करती है, लेकिन इन पैसों का बंदरबांट कर कागजों में ही चापाकल ठीक कर दिया जाता है और हकीकत में ये खराब पड़े होते हैं. खराब पड़े हैंडपंपों का ठीक नहीं करा पाने के पीछे विभाग मिस्री की कमी गिना रहा है. उसका कहना है कि मिस्री के पद रिक्त होने से समस्या आ रही है.
क्या कहते है जनप्रतिनिधि: स्थानीय डीबी रोड की पार्षद रेशमा शर्मा व डेजी भारती कहती है कि बाजार में पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए सार्वजनिक जगहों पर पियाउ की व्यवस्था होगी. नगर परिषद की पहली बैठक में इस बाबत निर्णय लिये जायेंगे. शहर में आने वाले लोगों को सुविधा देना नप का फर्ज है.
