अध्यात्म. महावीर स्थान में 11 दिवसीय रूद्र महायज्ञ का समापन
भक्ति रस में गोता लगाते रहे श्रद्धालु
सिमरी बख्तियारपुर : प्रखंड के सरोजा पंचायत स्थित साकेत वासी स्व मनोहर दास महाराज की कर्मस्थली पंचमुखी महावीर स्थान में आयोजित ग्यारह दिवसीय रूद्र महायज्ञ के अंतिम दिन पूजन, हवन, भंडारन एवं बुराइयों के त्याग के संकल्प के साथ संतों के उपदेश को अपने जीवन में आत्मसात करने के वचन के साथ संपन्न हुआ. अयोध्या के संत भरत दास शास्त्री महाराज ने भगवान राम एवं हनुमान की महिमा का बखान करते हुए कहा कि हरिनाम संकीर्तन करते हुए सभी सांसारिक दायित्वों का निर्वाहण प्रत्येक प्राणी को प्रसन्न्तापूर्वक आपसी सौहार्द्र के साथ करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि अपने कष्ट की परवाह किये बिना दूसरों के कष्ट को दूर करने वाला ही सच्चा संत कहलाता है. उन्होंने कहा कि भागवत कथा का अनुश्रवण कर मानव पहले अपने स्वरूप को जाने. तभी परमात्मा को पाने का मार्ग प्रशस्त होगा. उन्होंने कहा कि मानव को अपने स्वरूप को जानने के लिए संतों की शरण मे जाना होगा. संत ही आपको अंधकार से प्रकाश की ओर ले जायेगा.
देश के विभिन्न भाग से जुटे संत : सरोजा की धरती पर पहली बार आयोजित हुए संत सम्मेलन को लेकर श्रद्वालुओं में काफी उत्साह देखा गया. सम्मेलन की विधिवत शुरुआत साकेत वासी संत भरत दास शास्त्री के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं भगवान सीताराम एवं हनुमत वंदना से किया गया. इस मौके पर भरत दास शास्त्री द्वारा रचित धार्मिक पुस्तक का विमोचन भी किया गया. मध्य प्रदेश के संत अशोक पंडित महाराज, अयोध्या धाम के राममोहन दास, हरिशरण महाराज, वृंदावनधाम के जय नारायण दास महाराज, चित्रकुट धाम से रामप्रिय दास महाराज, अयोध्या अणी अखाड़ा के महंत धर्मदास महाराज, सियाराम महाराज, सीताराम दास महाराज, प्रेमदास महाराज आदि संतों ने अपने अपने विचार रख कर माहौल को भक्तिमय बना दिया. संतों ने कहा कि महारूद्र यज्ञ का सरोजा जैसे इलाके में आयोजित होना इस बात का प्रमाण है कि यहां के लोगों पर सीताराम की प्रेमभक्ति की अवश्य बारिश होगी. कार्यक्रम का संचालन सरडीहा के मुखिया सुमन कुमार सिंह ने किया. मौके पर यज्ञ आयोजन समिति के अध्यक्ष गुलाब सिंह, जयशंकर सिंह, धर्मवीर सिंह, दिलीप दास, दीपक सिंह, नंदन सिंह, रंजीत कुमार सिंह, बिट्टू सिंह, उदय सिंह, सुदर्शन सिंह, सुभाष सिंह, राजेश यादव, राणाप्रताप सिंह, बंदन सिंह, राजकिशोर सिंह सहित अन्य ने माल्यार्पण कर संतों का सम्मान किया.
