सहरसा पहुंचे गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सुकमा में हुए नक्सली हमले पर कहा
नहीं करने देते आदिवासी क्षेत्र का विकास, लेकिन यह नहीं चलेगा
बोले, भारत को बनायेंगे स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत
सहरसा : छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुआ नक्सली हमला उग्रवादियों की कायरतापूर्ण हरकत है. भोले-भाले आदिवासियों को आगे कर सीआरपीएफ के जवानों पर गोलियों चलाना बुजदिली है. अगर मां का दूध पिया होता तो सामने आकर जवानों पर गोलियां चलाते. मासूम आदिवासियों को ढाल नहीं बनाते. मंगलवार को शहर के पटेल मैदान में आयोजित विजयोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हम आदिवासी क्षेत्रों का विकास करना चाहते हैं.
वहां स्कूल, सड़क बनाना चाहते हैं. अस्पताल खोलना चाहते हैं, पर उग्रवादी व नक्सली तत्व ऐसा नहीं चाहते. लेकिन हम भी अब उनकी मर्जी नहीं चलने देंगे. गृहमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़ा हादसा हुआ. लेकिन बाबू वीर कुंवर सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानी का कार्यक्रम था. इसलिए आना ही पड़ा. उन्होंने कहा कि जमाना बदल रहा है. भारत की ताकत का एहसास विश्व के सभी देशों को होने लगा है.
सुकमा हमला उग्रवादियों…
भारत-पाकिस्तान के हालिया टकराव का जिक्र करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान ने हमारे जवानों को मारा, तो हम पाकिस्तान के अंदर जाकर आतंकवादियों को सबक सिखा आयें. सितंबर में भारत के पांच नागरिकों के पाकिस्तानी हमले में मारे जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमने बॉर्डर सिक्यूरिटी के निदेशक को आदेश दिया कि अगर कोई हम पर एक गोली चलाये, तो भारत की ओर से चलने वाली गोलियां की गिनती न की जाय. मोदी सरकार के तीन सालों की उपलब्धि का जिक्र करते हुए गृहमंत्री श्री सिंह ने कहा कि 2022 तक भारत की हालत में पूर्ण परिवर्तन कर इसे एक विकसित राष्ट्र की श्रेणी में खड़ा करने का लक्ष्य है
. किसानों की आमदनी को दोगुना करने की कोशिश की जा रही है. बाबू वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद कुंवर सिंह सहित सभी स्वतंत्रता सेनानियों की चर्चा करते व उनके प्रेरक किस्से सुनाते हुए गृहमंत्री ने कहा कि हम भारत को स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत बनाने की कोशिश कर रहे हैं. जो आजादी के 70 सालों में अब तक नहीं हुआ है.
विधायक नीरज कुमार बबलू की अध्यक्षता व रवि रंजन के मंच संचालन में आयोजित समारोह को पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय, सांसद चिराग पासवान, सांसद अश्विनी चौबे, प्रेम कुमार, गोपाल नारायण सिंह, चौधरी महबूब अली कैसर सहित अन्य ने भी संबोधित किया.
हमले के बाद गम और गुस्से में देश, सुकमा में गृह मंत्री का एलान
एजेंसियां4 रायपुर, नयी दिल्ली
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने एलान किया कि सुकमा हमले के परिप्रेक्ष्य में देश भर में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रही रणनीति की समीक्षा की होगी. जरूरत पड़ने पर संशोधन भी करेंगे.आठ मई को दिल्ली में नक्सल प्रभावित राज्यों की बैठक बुलायी गयी है. रायपुर में सुकमा हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित के बाद संवाददाताओं से राजनाथ ने कहा कि सीआरपीएफ के जवानों का बलिदान किसी भी सूरत में व्यर्थ नहीं जायेगा. इसे चुनौती के रूप में हमने स्वीकार किया है. उन्होंने कहा कि नक्सली आदिवासियों को अपनी ढाल बनाकर विकास
व्यर्थ नहीं जायेगा…
के खिलाफ अभियान छेड़ रहे हैं. लेकिन, हम उन्हें किसी भी सूरत में कामयाब नहीं होने देंगे. आदिवासियों व गरीबों के सबसे बड़े दुश्मन वामपंथी उग्रवादी ही हैं. उन्होंने कहा कि इस घटना में 25 जवानों की जानें गयी है और सात घायल हुए हैं.
हमले का मास्टरमाइंड ‘हिडमा’ !
अब तक मिले सबूतों से पता चलता है कि हमले का मास्टर माइंड नक्सली कमांडर मडवी हिडमा है. मडवी हिडमा उर्फ हिडमन्ना की उम्र 25 साल है. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक वो सुकमा में जंगरगुंडा इलाके के पलोडी गांव का रहने वाला है. पुलिस ने उस पर 25 लाख रुपये के इनाम भी रखा है.
शहादत पर गर्व, ठोस कार्रवाई करे सरकार
हमले में शहीद हुए रणबीर सिंह (अमृतसर) के परिजनों ने कहा कि हमें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है लेकिन दुःख इस बात का है कि सरकार नक्सलियों को खत्म नहीं कर पा रही है. वहीं शहीद नरेश कुमार (सोनीपत) की पत्नी राजबाला चाहती हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा मिले. शहीद राममेहर (करनाल) के पिता का कहना है कि देश सेवा में बेटे ने प्राण न्योछावर किये हैं. इस बात का गर्व है, लेकिन कब तक नक्सली हमारे लालों को जान लेते रहेंगे. सरकार को कठोर कार्रवाई करनी चाहिए.
क्यों होते हैं ऐसे हमले दो बड़ी वजह
राज्य के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन का मानना है कि माओवादियों ने खुद को काफी तैयार किया है. नक्सली कैंप में मिलिट्री के समकक्ष ट्रेनिंग मिलती है. इसी वजह से नक्सलियों को फौज की लड़ाई की रणनीति की पूरी जानकारी होती है.
दूसरी बात नक्सली हर एनकाउंटर का विश्लेषण बेहद गहराई से करते हैं. तभी वे ऐसे खतरनाक हमलेको अंजाम देते हैं. नक्सलियों से लड़ने के लिए सुरक्षाकर्मियों को अतिरिक्त ट्रेनिंग की जरूरत है. ताकि वे स्थानीय चीजों को बेहतर ढंग से समक्ष सकें .
व्यर्थ नहीं जायेगा बलिदान
