सदर अस्पताल. प्रशासनिक लापरवाही से बेकार पड़ा है विभाग
सहरसा : सरकार के निर्देश पर सदर अस्पताल व पीएचसी में युवा व नि:शक्त क्लिनिक आनन-फानन में शुरू तो कर दिया गया, लेकिन उसे देखने वाला कोई नहीं है. हालात यह है कि दोनों क्लिनिक कागज पर ही युवा व नि:शक्तों का इलाज कर रहे हैं. जिसे देखने की फुर्सत ना ही जिला प्रशासन को है और ना ही स्वास्थ विभाग को.
इस स्थिति में स्वास्थ को बेहतर बनाने का दावा कहां तक उचित है, कहना बेईमानी होगी. सोमवार को जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग के समीक्षा के दौरान युवा क्लिनिक का शत प्रतिशत क्रियान्वित करने व प्रतिवेदन ससमय देने का निर्देश दिया गया. जिसके बाद लोगों खासकर युवा व नि:शक्तों के बीच क्लिनिक का सुचारू रूप से चलने की उम्मीद जगी है.
सदर अस्पताल में रहता है बंद
युवाओं व नि:शक्तों के लिए विशेष क्लिनिक उद्घाटन के बाद से ही अपेक्षित है. प्रमंडलीय मुख्यालय के सदर अस्पताल स्थित ओपीडी भवन के एक कमरे में खोला गया क्लिनिक उद्घाटन के कुछ दिन बाद से ही बंद है. कमरे का उपयोग दूसरे काम में हो रहा है. इस बाबत नोडल पदाधिकारी डॉ संजय कुमार सिंह ने कहा कि युवा क्लिनिक के लिए ना ही अलग से भवन की व्यवस्था की गयी और ना ही चिकित्सक व कर्मियों की. जिसके कारण क्लिनिक चलाने में काफी परेशानी हो रही है. पीएचसी में कहीं कहीं चलता है. जब तक इसके लिए अलग से भवन, चिकित्सक, कर्मी की व्यवस्था नहीं होगी. क्लिनिक चलाने में परेशानी है. समस्या से अवगत करा दिया गया है.
आनन-फानन में हुआ था उद्घाटन
अस्पताल चलाने को दी गयी थी टेबुल-कुरसी
क्लिनिक को चलाने के लिए सदर अस्पताल व पीएचसी को 25 हजार की कुर्सी, टेबल व अन्य सामान दिया गया था. जिसके बाद प्रति वर्ष दस हजार रुपये रखरखाव के लिए दिया जाना है. लेकिन लापरवाही से ये सभी सामान बेकार हैं. न ही लोगों को फायदा हो रहा है.
युवा क्लिनिक खोलने का सरकार का उद्देश्य यह था कि नौ से 19 वर्ष के युवक व युवती बिना किसी परेशानी के अपनी परेशानी मौजूद डॉक्टर व कर्मी को बता सकें. क्लिनिक में प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी परामर्श सेवा, किशोरावस्था के दौरान पोषण संबंधी सलाह, एनीमिया की जांच, उपचार व परामर्श, महावारी से संबंधित समस्याओं पर सलाह व उपचार, प्रजनन तंत्र संक्रमण व यौन जनित रोगों पर परामर्श, प्रसव पूर्व जांच एवं सलाह, गर्भनिरोधक संबंधी परामर्श, सुरक्षित गर्भपात के लिए मार्गदर्शन, विवाह के आयु पर परामर्श, समुचित रेफरल सेवा की व्यवस्था होनी थी. लेकिन युवकों को इसका लाभ नहीं मिल पाया.
