वाहनों में हुई अप्रत्याशित वृद्धि पर सड़क चौड़ीकरण की नहीं बनी योजना
सहरसा : बीते दस वर्षों में शहर में सभी तरह के वाहनों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई है. उन वाहनों से रजिस्ट्रेशन एवं रोड टैक्स से सरकार को मिलने वाले राजस्व में भी संख्या के अनुसार इजाफा हुआ है. लेकिन उन वाहनों के लिए शहर में सड़क की सुविधा में कोई बढ़ोतरी नहीं की गयी है. इससे जाम व प्रदूषण की समस्या गहराती जा रही है.
समय अधिक, स्वास्थ्य खराब
प्रमंडलीय मुख्यालय होने के बाद भी शहर में चौड़ी सड़कों का सर्वथा अभाव है. किसी भी सड़क पर पार्किंग नहीं होने से वाहनों के पल भर भी खड़ी होने से जाम का लगना तय हो जाता है. जाम लगते ही मिनट का सफर घंटे में घंटे का सफर और भी लंबा होता जाता है. इस जाम के दौरान ध्वनि प्रदूषण तो बलवती होती ही है. स्टार्ट गाड़ियों से शीशा युक्त धुआं भी निकलता है. जिसका सीधा असर उस भीड़ में शामिल लोगों के स्वास्थ्य पड़ता है.
जाम की जड़ में है अतिक्रमण
डीबी रोड की सड़क को चौड़ी किए बिना डिवायडर लगा देने से जाम की समस्या कम होने की बजाय और भी बढ़ गयी है. जबकि शंकर चौक से दहलान चौक और दहलान चौक से महावीर चौक तक की सड़क पहले से संकीर्ण है. इन सड़कों पर एक वाहन के भी रुकने से तुरंत गाड़ियों की लंबी कतार लग जाती है. इस मार्ग पर अतिक्रमण भी जाम का बड़ा सहायक बना हुआ है. इन प्रमुख मार्गों से अतिक्रमण हटाने में भी प्रशासन की कोई दिलचस्पी नहीं होती है. शहर की बढ़ती व्यस्तता को देख स्पष्ट होता है कि जब तक सभी प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण नहीं किया जायेगा. तक तक शहर की ट्रैफिक व्यवस्था नहीं संभलेगी. शहर को विकसित बनाने के लिए सरकार को योजना बनानी होगी.
बस को मोड़ने में होती है परेशानी
जिला प्रशासन द्वारा नो इंट्री लागू करने के बाद पश्चिम की ओर जाने वाली सभी बसों का परिचालन गंगजला व थाना चौक होकर होता है. लेकिन थाना चौक से गंगजला चौक की ओर बढ़ते ही सड़क काफी संकीर्ण होती चली गयी है. रेलवे क्रॉसिंग से पहले और बाद में अतिक्रमण से इसे गली का रूप दे दिया है. इन दोनों ही चौराहों के अति संकीर्ण होने से बसों को मोड़ने में काफी परेशानी होती है. कम जगह में मोड़ने के क्रम में हर पल दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. जाम तो लग ही जाता है. अक्सर बस नियमों को ताख पर रख सुविधानुसार गलत दिशा से मोड़ने को मजबूर होते हैं. गंगजला चौक से पंचवटी तक सड़क के चौड़ी नहीं होने से दोनों ओर से बसों के आ जाने पर समस्या और भी गहरा जाती है. यही हाल प्रशांत मोड़ के पास भी है.
