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उग्रतारा महोत्सव. कलाकारों के नामों की अब तक नहीं हुई है घोषणा उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव की तैयारी को लेकर कई बैठक हो चुकी है. इसके बावजूद कलाकार व कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर किसी भी प्रकार का निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है. जबकि महोत्सव में सेमिनार व प्रख्यात कलाकारों की प्रस्तुति हमेशा से चर्चा […]

उग्रतारा महोत्सव. कलाकारों के नामों की अब तक नहीं हुई है घोषणा

उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव की तैयारी को लेकर कई बैठक हो चुकी है. इसके बावजूद कलाकार व कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर किसी भी प्रकार का निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है. जबकि महोत्सव में सेमिनार व प्रख्यात कलाकारों की प्रस्तुति हमेशा से चर्चा का विषय बनती रही है.
सहरसा : दो अक्तूबर से जिले के महिषी में आयोजित तीन दिवसीय उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव की तैयारी को लेकर कई बैठक हो चुकी है. इसके बावजूद कलाकार व कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर किसी भी प्रकार का निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है. जबकि महोत्सव के प्रमुख आकर्षण में सेमिनार व प्रख्यात कलाकारों की प्रस्तुति हमेशा से चर्चा का विषय बनती रही है. स्थानीय लोगों के बीच अभी तक सेमिनार के विषय वस्तु को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई है. इसके अलावा स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति को लेकर कोई रणनीति नहीं बनायी गयी है.
जबकि पूर्व में महोत्सव से पंद्रह दिन पूर्व मुख्यालय सहित राजधानी में होर्डिंग व पोस्टर लगाये जाते थे. कलाकारों का चयन पूर्व में होने से प्रचार-प्रसार करने में समिति को सहुलियत होती थी. ज्ञात हो कि बीते महोत्सव में जिला प्रशासन द्वारा ही कलाकारों के चयन में महती भूमिका निभाते महोत्सव समिति द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाता था. जबकि इस बार लाखों के भुगतान पर पहुंचने वाले फनकारों की प्रस्तुति का जिम्मा कला संस्कृति व पयर्टन विभाग द्वारा स्वयं ले लिया गया है. विभागीय स्तर से कार्यक्रम की रूपरेखा व विशेष आकर्षण के बाबत जानकारी नहीं दिये जाने से आयोजन समिति मूकदर्शक बन कर रह गयी है व मंच एवं पंडाल निर्माण के प्रक्रिया में जुटी हुई है.
प्रचार प्रसार के नाम पर खानापूर्ति :
उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव प्रत्येक वर्ष प्रचार-प्रसार की कमी की वजह से जिले के कुछ भागों में ही सिमट कर रह जाती है. जबकि राज्य सरकार महोत्सव को राज्यस्तर पर प्रचारित करने के उद्देश्य से कार्य करती है. स्थानीय स्तर पर राज्य से भेजे गये बैनर, होर्डिंग व बैनर मुख्यालय के सामने व कार्यक्रम स्थल के अलावा कही भी नजर नहीं आते हैं. जबकि इस मद में हजारों रुपये खर्च किये जाते रहे हैं. जबकि महोत्सव के उद्देश्य को सफल बनाने के लिए राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार की जरूरत है.
बढ़ने के बजाय कम हो रहा है आकर्षण
महोत्सव स्थल का जायजा लेते डीएम विनोद सिंह गुंजियाल, एसडीओ व अन्य.
महोत्सव स्थल का जायजा लेते डीएम विनोद सिंह गुंजियाल, एसडीओ व अन्य.
महोत्सव में प्रबंधन का अभाव
जिले में आयोजित कोसी व उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन समिति का गठन प्रत्येक वर्ष नहीं होने से कार्यक्रम में विविधता नहीं आ पाती है. जबकि इस प्रकार के आयोजन समिति में नये लोगों के जुड़ाव से नई अवधारणा मंच तक पहुंचती है. स्थानीय लोग बताते हैं कि दर्जनों की तादाद में ऐसे लोग इन समिति का हिस्सा बनते हैं. जिन्हें इन चीजों का कोई अनुभव नहीं रहता है. नये लोगों को समिति में स्थान देने के बजाय पुरानी सूची का अनुमोदन बैठक में कर दिया जाता है.

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