20 रुपये में जार में खुलेआम बिक रहा पानी
शहर से लेकर गांव तक की बड़ी आबादी चपेट में
सहरसा : शहर में मिनरल वाटर के नाम पर अशुद्ध पानी का कारोबार फलफूल रहा है. गरमी में मिनरल वाटर की मांग बढ़ जाती है. इसका फायदा कारोबारी उठाते हैं. शहर के आसपास के क्षेत्रों में कई ऐसी कंपनियां खुल गयी हैं, जो बिना रजिस्ट्रेशन कराये पानी का कारोबार कर रही हैं. सरकारी आंकड़ों में इन प्लांटों की जानकारी भी नहीं है. इसके बावजूद पानी के नाम पर लोगों को जहर बेचा जा रहा है.
मोटर के पानी को ठंडा करने का धंधा
गौर करने की बात है कि इन अवैध कारोबारियों के पास जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है. न तो टेस्टिंग लैब है और ही प्यूरीफायर. केवल बॉटलिंग और जार बनाने की मशीन है. जार और बोतल में मिनरल वाटर के नाम पर बोरबेल और नलों का पानी भरा जा रहा है. शुद्ध पानी के नाम पर शहरवासियों को जहर परोसा जा रहा है. रोजाना 1.20 लाख लीटर पानी का अवैध कारोबार हो रहा है. इसकी जानकारी जिला प्रशासन के अधिकारियों को भी है. मगर कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में इनके हाथ-पैर फूल जाते हैं. जिम्मेदारों के सुस्त रवैये के कारण व्यवसायियों के हौसले बुलंद हैं. विभाग के अधिकारी कहते हैं कि अवैध मिनरल वाटर की शिकायत नहीं मिली है. शिकायत मिलने पर जरूर कार्रवाई होगी.
ठेला व ऑटो पर लदा मिनरल वाटर
मिनरल वाटर के नाम पर शहरवासी जहर पी रहे हैं. लैब में टेस्टिंग किये बगैर अशुद्ध पानी जार और बोतल में पैक कर बाजार में ठेला व ऑटो के जरिये धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं. पानी में आर्सेनिक और आयरन जैसे जहरीले तत्व मिले हैं, पानी दरअसल जहर बन चुका है. जिनका असर सबसे पहले त्वचा और फिर पेट पर पड़ता है. वक्त रहते इस पानी से अगर नहीं बचे, तो सांसें बचाना मुश्किल हो जाता है.
देखभाल कर लें जार बंद पानी
क्या है नियम
किसी भी हाल में मिनरल वाटर प्लांट लगाने के पूर्व अनुमति लेना जरूरी है. आवेदन पर विभागीय भौतिक सत्यापन के बाद ही रजिस्ट्रेशन दिया जाता है. अगर कोई बगैर रजिस्ट्रेशन लिए मिनरल वाटर कंपनी चला रहा है, तो गलत है. ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. विभाग के पास अभी ऐसी सूचना नहीं है कि अवैध रूप से कोई प्लांट चला रहा है.
निजी कंपनियों की जांच के लिए नहीं है प्रयोगशाला
जिले में निजी कंपनी के पानी की जांच के लिए कोई प्रयोगशाला नहीं है. सरकारी चापानलों के पानी की जांच की जाती है.
विभाष आनंद, एसडीओ,पीएचइडी
कानूनी कार्रवाई का भी है प्रावधान
बिहार सरकार के अनुसार, अगर कोई अवैध रूप से मिनरल वाटर बनाने और पैकेजिंग का प्लांट चला रहा है, तो कंपनी संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. पांच हजार रुपये से लेकर 2.5 लाख रुपये तक जुर्माना व छह माह की जेल की सजा हो सकती है. इसके पूर्व बोर्ड की ओर से कंपनी को नोटिस जारी होता है. कंपनी संचालक तत्काल जवाब नहीं देता है तो विभाग मुकदमा भी दर्ज कर सकती है. मिनरल वाटर कंपनी खोलने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है. इसके बाद फूड डिपार्टमेंट, स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से लाइसेंस लेना पड़ता है.
