उदासीनता. योजनाओं पर हो रहा करोड़ों खर्च
कहरा : प्रखंड क्षेत्र में सभी पंचायतों में प्रत्येक साल पंचायत विकास हेतु प्रत्येक पंचायत में करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं. जिससे पंचायत देखने में ही विकसित लगे. लेकिन विकास का दावा कर निर्वाचित होने के बाद प्रतिनिधि खुद का तो विकास कर लेते हैं. लेकिन पंचायत पीछे छूट जाता है. इसका उदाहरण अभी हो रही बारिश के समय में प्रखंड के सभी पंचायतों में जाने के बाद पता चलता है. मनरेगा, बीआरजीएफ, सफाई आदि के नाम पर कागज पर करोड़ों खर्च दिखाया जाता है. लेकिन वह योजना सरजमीन पर नहीं उतर पाती है. दुख तब होता है, जब जिले नहीं देश विदेश में भी बनगांव पंचायत का नाम होने का दावा करने वाले ग्रामीण खुद अपने पंचायत के विकास कराने में अक्षम दिखते हैं.
ऐसे में अन्य पंचायतों की चर्चा ही बेकार है. विगत कई वर्षो से बनगाव उत्तरी एवं दक्षिणी पंचायत के प्रतिनिधियों द्वारा पंचायत के विकास के लिए कई कार्यक्रम व योजना कराया गया. लेकिन कोई भी विकास को धरातल पर उतार नहीं पाये. दोनों पंचायत से होकर गुजरने वाली मुख्य सड़क पर भी पानी लगने से अन्य प्रखंड के पंचायतों के लोग के गुजरने पर सोचने को मजबूर हो जाते हैं जब ऐसे शिक्षित एवं प्रबुद्ध लोगों की नगरी की ऐसी हालत है तो अन्य पंचायतों का क्या हाल होगा. अब भी लोग आने वाले पंचवर्षीय में विकास की उम्मीद लिए बैठे हैं. शायद प्रतिनिधि एवं ग्रामीणों के सहयोग से पानी सहित अन्य समस्याओं का निदान हो सके.
बीआरजीएफ, सफाई योजना आज तक जमीन पर नहीं उतर पायी
