अब तक पर्यटन के मानचित्र पर शामिल नहीं हो सका मटेश्वरधाम

सावन में 10 लाख से अधिक कावंरियां करते हैं जलाभिषेक सावन की पूजा की तैयारी शुरू सिमरी : सहरसा रेलवे स्टेशन से 17 किलोमीटर दूर सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के बलवाहाट काठो में अवस्थित मटेश्वरधाम शिव मंदिर का पौराणिक महत्व है. यहां सावन में बाबा मटेश्वरनाथ महादेव पर जलाभिषेक के लिए भारी भीड़ उमड़ती है. श्रद्धालुओं […]

सावन में 10 लाख से अधिक कावंरियां करते हैं जलाभिषेक

सावन की पूजा की तैयारी शुरू
सिमरी : सहरसा रेलवे स्टेशन से 17 किलोमीटर दूर सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के बलवाहाट काठो में अवस्थित मटेश्वरधाम शिव मंदिर का पौराणिक महत्व है. यहां सावन में बाबा मटेश्वरनाथ महादेव पर जलाभिषेक के लिए भारी भीड़ उमड़ती है. श्रद्धालुओं का मानना है कि मटेश्वर महादेव परम दयालु हैं एवं इनके दर पर से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता है.सच्चे मन से जो भी बाबा की पूजा-अर्चना कर जलाभिषेक करते हैं, उनकी मुराद अवश्य पूरी होती है.
सावन करीब, तैयारियां शुरू
इसी महीने की 27 तारीख से प्रारंभ श्रावण को लेकर बाबा मटेश्वर धाम में तैयारी शुरू कर दी गयी है. मंदिर के रंग-रोगन से लेकर कांवरिया एवं श्रद्धालुओं को किसी भी तरह का दिक्कत नहीं हो, इसके लिए सभी तरह की तैयारी की जा रही है. मंदिर परिसर स्थित बाढ़ आश्रय स्थल में बैठने एवं कांवरियों के आराम करने की व्यवस्था हो रही है. मंदिर के सचिव जितेन्द्र सिंह बघेल ने समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम को आवेदन देकर मानसी एवं कोपरिया के बीच स्थित सभी पुलों पर कॉशन लगाने की मांग की है, ताकि रात में आने वाली सभी गाड़ी पुल के पास रुक सके,
चूंकि रात को भारी संख्या में कांवरिया इन्हीं पुल से पार करते हुए मटेश्वर धाम की ओर जल लेकर आते है. मालूम हो कि कई बार पुल पार करते हुए कांवरिया ट्रेन की चपेट में आकर हादसे का शिकार हो चुके हैं. इसमें कई कांवरियों की जान भी जा चुकी है. अगर पुल के पास ट्रेन रुकती है, तो कांवरिया को पुल पार करने में सुविधा मिलेगी. और किसी भी अनहोनी से खुद को कांवरिया बचा पायेंगे.
ऐसे पहुंचते हैं कांवरिये
सावन माह में कांवरिया मुंगेर के छर्रापट्टी घाट से गंगाजल लेकर 98 किलोमीटर की कठिन यात्रा कर बाबा का जलाभिषेक करने के लिए मटेश्वर धाम पहुंचते हैं. यहां तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं है. बदला घाट रेलवे स्टेशन से कोपरिया व सिमरी बख्तियारपुर तक रेलवे लाइन के पथरीले रास्ते से होकर कांवरियों को जल लेकर आना पड़ता है. यह यात्रा देवघर की यात्रा से कम नहीं है.
अदभुत है यहां का शिवलिंग
काले पत्थर के स्वरूप मटेश्वर धाम का शिवलिंग अद्भुत है यहां शिवलिंग के परिधि में अठपहल चबूतरा बना है. शिवलिंग का चबूतरा से स्पर्श नहीं है. दोनों के बीच डेढ़ इंच का शून्य है, जिसमें हमेशा जल भरा रहता है. गर्मी के दिनों में शिवलिंग के चारो ओर जलस्तर उठा रहता है. जबकि सावन भादो में जलस्तर नीचे चला जाता है. कहा जाता है कि यह शिवलिंग पताल से स्वयं अवतरित हुआ है. धार्मिक विद्वानों का मानना है कि ऐसे ही शिवलिंग की चर्चा शिवपुराण में है जो पाताल से प्रस्फुटित हुआ है और इसका संपर्क पृथ्वी से जुड़ा नहीं है.
पर्यटन स्थल के रूप में नहीं हुआ विकास
25 फुट ऊंचे टीले पर बना मटेश्वरधाम मंदिर 25 एकड़ में फैला हुआ है. इसकी धार्मिक महत्ता को देखते हुए यह क्षेत्र अब तक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं हो पाया है. पिछले वर्ष क्षेत्रीय विधायक डा अरुण कुमार ने मटेश्वरधाम के महत्व पर चर्चा करते हुए पर्यटन स्थल के रूप में इसे विकसित करने का मामला विधानसभा में भी उठाया था.
सरकार की ओर से सकारात्मक जबाव भी आया. किंतु, अब तक पर्यटन विभाग द्वारा इस स्थल के निरीक्षण का काम भी शुरू नहीं हो पाया है. जबकि यह स्थल अपनी धार्मिक महत्ता को लेकर देवघर व सिंहेश्वर स्थान के शिवलिंग व स्थल के रूप में शामिल हो चुका है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >