सहरसा-फारबिसगंज : रेलखंड स्थित सुपौल स्टेशन से प्रतिदिन करीब डेढ़ हजार यात्री विभिन्न शहरों के लिए रवाना होते हैं. यह आंकड़ा रेलवे के टिकट काउंटर का है. इसके अतिरिक्त भी सैकड़ों यात्री आसपास के स्टेशनों के लिए ट्रेन पकड़ते हैं. इन यात्रियों द्वारा टिकट कटाने से रेलवे को प्रतिदिन लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है. लेकिन विभागीय अधिकारियों की मनमानी के कारण इन यात्रियों को सुविधा के नाम पर कुछ भी उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है.
और तो और पर्याप्त ट्रेन की व्यवस्था भी इस रेलखंड में नहीं है. ज्ञात हो कि सहरसा-फारबिसगंज रेलखंड के बीच आमान परिवर्तन की घोषणा के बाद मेगा ब्लॉक लिया गया. जिसके बाद सहरसा से थरबिटिया स्टेशन तक ही ट्रेनों का परिचालन हो रहा है. मात्र छह जोड़ी ट्रेन इस रेलखंड में संचालित है. यही वजह है कि इस रेलखंड के यात्रियों को ट्रेन के छत पर सफर करने की बाध्यता बनी हुई है.
ट्रेन के समय सारणी को लेकर यात्रियों द्वारा शिकायत दर्ज कराये जाने के बाद वाणिज्य अधीक्षक के माध्यम से वरीय अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया है. इस संबंध में निर्णय लेने का अधिकार वरीय अधिकारियों को है.
