आरएडी ने दिया लिपिक को हटाने का निर्देश
सहरसा सिटी : सदर अस्पताल में लाखों के वित्तीय अनियमितता का मामला प्रकाश में आया है. यह अनियमितता लाख-दो लाख नहीं, बल्कि 46 लाख से अधिक की है. अनियमितता के उजागर होने के बाद कर्मियों व अधिकारियों में बैचेनी बढ़ गयी है. क्षेत्रीय अपर निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं शशिभूषण शर्मा के गुरुवार को सदर अस्पताल के निरीक्षण के दौरान एनएचएम के अंतर्गत आवंटित राशि की रोकड़पंजी का अवलोकन करने के बाद यह खुलासा हुआ है.
निरीक्षण के दौरान 31 मार्च तक एनएचएम पार्ट ए की रोकड़पंजी का अंतिम अवशेष 5 लाख 21 हजार 687 रुपये दरसाया गया है, जबकि बैंक स्टेटमेंट में अंतिम अवशेष की राशि 51 लाख 40 हजार 413 रुपये है. कैश बुक एवं बैंक स्टेटमेंट के अंतिम अवशेष में 46 लाख 18 हजार 726 रुपये का अंतर पाया गया. लिपिक सुधीर राउत से बीआरएस मांगने पर उसने बताया कि बीआरएस नहीं बनाया गया है. रोकड़पंजी में बैंक से अर्जित ब्याज की राशि नहीं दरसायी गयी है.
एनएचएम पार्ट बी खाते का बैंक स्टेटमेंट नहीं उपलब्ध कराया गया. रोगी कल्याण समिति की संचिका के अवलोकन से पाया गया कि भुगतान किये गये अभिश्रव पर आहरण एवं वितरण पदाधिकारी द्वारा बिना अनुमोदन लिये ही भुगतान किया गया है. वहीं दोनों खाते का चेक निर्गत पंजी नहीं बनाया गया है.
स्थापना कार्यालय के रोकड़पंजी की जांच के दौरान पाया गया कि 14 जनवरी के बाद से रोकड़पंजी हस्ताक्षरित नहीं की गयी है. आरएडी श्री शर्मा ने सिविल सर्जन को लिपिक श्री राउत को हटा कर लेखा के जानकार आदमी को प्रभार देने की निर्देश दिया.
