पुआल : बिछावन भी, जलावन भीजाड़े का मौसम में गरीबों की आफत बढ़ा देता है. पुरुष परदेस में मजदूरी करते हैं. ऐसे में महिलाएं खेत-खलिहानों से पुआल जमा करती है. इसे धूप में सुखा कर बिछावन या जलावन के रूप में उपयोग किया जाता है. सहरसा के सलखुआ अंचल में कोसी कछार के एक गांव है गोसपुर. वहीं बहियार में ये महिलाएं पुआल के लिये मेहनत कर रही हैं . फोटो । अजय कुमार
पुआल : बिछावन भी, जलावन भी
पुआल : बिछावन भी, जलावन भीजाड़े का मौसम में गरीबों की आफत बढ़ा देता है. पुरुष परदेस में मजदूरी करते हैं. ऐसे में महिलाएं खेत-खलिहानों से पुआल जमा करती है. इसे धूप में सुखा कर बिछावन या जलावन के रूप में उपयोग किया जाता है. सहरसा के सलखुआ अंचल में कोसी कछार के एक गांव […]
