आरक्षण को ले पंचायत प्रतिनिधि में उहापोह सहरसा. पंचायत चुनाव-2016 को लेकर वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों में उहापोह की स्थिति है. सूत्रों की मानें तो इस चुनाव में आरक्षण की स्थिति बदलना तय है. इसके कारण वर्तमान प्रतिनिधि दूसरे विकल्प की तलाश में भी जुट गये हैं. खासकर मलाईदार पद वाले प्रतिनिधियों पर एक तरह का पहाड़ टूटने जैसा प्रतीत होता नजर आ रहा है. वहीं पंचायत राजनीति से जुड़े रहने वाले कई लोग आरक्षण बदलने का इंतजार में लगे हैं, जिसमें उन्हें मौका मिले. कई दबंग प्रतिनिधियों ने आरक्षण कोटा में नहीं आने पर मुखिया छोड़ जिला परिषद या पंचायत समिति पद से ही अपना भाग्य आजमाने की ठान रखी है. वर्तमान में जिले के 151 पंचायतों में आरक्षण बदलने से वर्तमान परिदृश्य बदला नजर आयेगा. इस संबंध में बिहार सरकार ने अभी तक अपना पत्ता नहीं खोला है, लेकिन प्रशासनिक स्तर से मतदाता विखंडन, चुनाव की तैयारी, वर्तमान स्थिति का सर्वे, कई स्तर पर बैठक कर पंचायती चुनाव के लिए कमर कसी जा रही है. लोगों को उम्मीद है कि पूर्व की तरह इस बार भी मलाईदार पद के लिए अन्य पदों से ज्यादा नामांकन होना तय है. वहीं सरपंच जैसे पद रहते हुए कई सरपंच इस पद से चुनाव नहीं लड़ना चाहेगा. कई सरपंच तो आरक्षण में मौका मिलने पर उसी पंचायत में मुखिया पद पर पर लड़ना नहीं छोड़ेंगे, जबकि कोई मुखिया वर्तमान पंचायती राज में सरपंच की स्थिति देख सरपंच का चुनाव नहीं लड़ना चाहेगा.
आरक्षण को ले पंचायत प्रतिनिधि में उहापोह
आरक्षण को ले पंचायत प्रतिनिधि में उहापोह सहरसा. पंचायत चुनाव-2016 को लेकर वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों में उहापोह की स्थिति है. सूत्रों की मानें तो इस चुनाव में आरक्षण की स्थिति बदलना तय है. इसके कारण वर्तमान प्रतिनिधि दूसरे विकल्प की तलाश में भी जुट गये हैं. खासकर मलाईदार पद वाले प्रतिनिधियों पर एक तरह का […]
