कोसी: बिजली के नाम पर ठगे जाते है लोग

कोसी: बिजली के नाम पर ठगे जाते है लोग चुनावी मुद्दाप्रचार गाड़ियों की आवाज से जग रहे हैं लोग प्रतिनिधि, सहरसा नगरदशहरा समाप्त होने के बाद कोसी इलाके में भी चुनावी सरगरमी बढ़ गयी है. कभी मंदिरों में होने वाली दुर्गा पाठ की आवाज से खुलने वाली लोगों की नींद अब उम्मीदवारों के प्रचार गाड़ी […]

कोसी: बिजली के नाम पर ठगे जाते है लोग चुनावी मुद्दाप्रचार गाड़ियों की आवाज से जग रहे हैं लोग प्रतिनिधि, सहरसा नगरदशहरा समाप्त होने के बाद कोसी इलाके में भी चुनावी सरगरमी बढ़ गयी है. कभी मंदिरों में होने वाली दुर्गा पाठ की आवाज से खुलने वाली लोगों की नींद अब उम्मीदवारों के प्रचार गाड़ी से खुलने लगी है. शनिवार को हमने महिषी विधानसभा क्षेत्र का जायजा लिया. चुनाव आयोग द्वारा मतदान प्रतिशत बढ़ाने को लेकर की जा रही अपील कारगर नजर आ रही है. लोग मतदान करने को उत्सुक दिख रहे है. हालांकि चाय व पान की दुकानों पर राजनीति की बातें होती है, लेकिन कोई भी पक्ष उम्मीदवार के नाम लेने से परहेज कर रहा है. इन सबों के बीच समस्याएं प्रमुख जगह बनाये हुई है. कोसी तटबंध के अंदर इस विधानसभा क्षेत्र की चालीस प्रतिशत जनता रहती है. जिन्होंने अपने जीवन काल में कभी बिजली नहीं देखी है. केदली पंचायत के रामदेव कहते है कि घरों में छोटे बच्चों को पुचकारने के लिए लोग चांद व सुरज के बजाय बिजली रानी के किस्से सुनाते है. आजादी के दशकों बाद भी कोसी तटबंध के अंदर रहने वाली लाखों जनता अंधकार में रहने को विवश है. कोसी तटबंध के अंदर दूर-दूर में बने टोले व खाली खेत बाहर से जाने वाले लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते है. मामा गाम में बिजली छैय यौकोसी तटबंध के अंदर घुमने के क्रम में हमारी मुलाकात सुखदेव पंडित के 13 वर्षीय पुत्र चंदन से होती है. वह बताता है कि बड़का बाबू (चाचा) के बेटी की शादी में जेनेरेटर से बिजली जली थी. उसके बाद कभी नहीं आयी है. वह बताता है कि मधेपुरा जिला के आलमनगर में उसके मामा का गांव है जहां बिजली लगी हुई है. इस क्षेत्र में बिजली की तुलना अभी भी चांद व सितारों से ही होती है. नेताजी हर बार कहते हैकेदली, रामपुर, डरहार, बकुनियां के लोग बताते है कि अभी ही नहीं सभी चुनाव में लोग आते है. हमलोगों को वोट देने पर बिजली पहुंचाने का भरोसा देते है. लेकिन चुनाव बाद सभी इसे मुश्किल काम बता भूल जाते है. गांव के हरेराम यादव कहते है कि जाति व धर्म के नाम पर बंटने का परिणाम है कि क्षेत्र में अंधेरा कायम है, जबकि इस चुनाव में विकास को संकल्पित उम्मीदवार का इंतजार कर रहे है. प्रचार गाड़ी के पीछे भागते है बच्चेगांव के जिन घरों में बच्चें मौजूद है वहां आपकों सभी प्रत्याशियों का पंपलेट व झंडा देखने को मिल जायेगा. पांचवी कक्षा में पढ़ने वाला रामाशंकर कहता है कि भोपू वाला गाड़ी में पर्चा बांटने आता है. घर के बड़े लोग बताते है कि बच्चें प्रचार गाड़ी जब तक गांव में घुमते रहती है बच्चे उसके पीछे भागते रहते है. इतना ही नहीं महिलाएं भी चुनाव गाडि़यों में बजने वाली गीतों के धून पर घरों की खिड़की व दहलीज तक पहुंच जाती है. लोकगीतों के तर्ज पर तैयार गीतों में भी जनता से वायदे किये जा रहे है. कमोबेश सभी क्षेत्रों का यही हाल है लोग धीरे-धीरे ही सही चुनावी रंग में डूबने लगे है. प्रत्याशियों के चुनाव निशान से ज्यादा जनता उनके बातों पर गौर कर रही है. फोटो- चुनाव 1- कोसी तटबंध के अंदर बसा बकुनियां गांवफोटो- चुनाव 2- प्रत्येक वर्ष कोसी लील लेती है किसानों की जमीन

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