विश्व की संस्कृति है योग

* 23 से 27 अक्तूबर तक मुंगेर में होगा विश्व योग सम्मेलनसहरसा : योग एक संस्कृति है. स्वयं को जानने की विद्या है. जो व्यक्ति स्वयं से परिचित हो गया, अपनी शक्ति का एहसास कर लिया, वह पूर्ण मानव होता है. योग को सिर्फ व्यायाम व आसान नहीं समझा जाना चाहिए. यह बातें मुंगेर के […]

* 23 से 27 अक्तूबर तक मुंगेर में होगा विश्व योग सम्मेलन
सहरसा : योग एक संस्कृति है. स्वयं को जानने की विद्या है. जो व्यक्ति स्वयं से परिचित हो गया, अपनी शक्ति का एहसास कर लिया, वह पूर्ण मानव होता है. योग को सिर्फ व्यायाम व आसान नहीं समझा जाना चाहिए.

यह बातें मुंगेर के बिहार योग विद्यालय से आयी संयासिनी स्वामी आत्मानुभूति ने कही. उन्होंने कहा कि योग में वह शक्ति है जो किसी भी तरह के रोगों को शरीर से दूर रखता है. स्वामी आत्मानुभूति ने बताया कि विश्व के प्रथम योग विश्वविद्यालय का यह पचासवां वर्ष है. स्वर्ण जयंती के अवसर पर मुंगेर में विश्व योग सम्मेलन का आयोजन हो रहा है.

23 से 27 अक्तूबर तक होनेवाले आयोजन में समस्त विश्व के योग साधक भाग लेंगे. सहरसा स्थित निरंजानंद योग शिक्षा केंद्र में भी तीन दिनों का शिविर आयोजित हुआ. सभी शिविरों में स्वामी आत्मानुभूति सहित मुंगेर से आये युवा योग मित्र मंडल के मुकेश कुमार एवं विवेक कुमार के अलावे योग प्रशिक्षक प्रवीण कुमार एवं सज्यजीत कुमार की भागीदारी रही.

विश्व योग सम्मेलन की तैयारी में स्थानीय निरंजनानंद योग शिक्षा केंद्र के अध्यक्ष राम सुंदर साहा, सचिव द्विजेंद्र नारायण सिंह सहित आशुतोष चौबे, सागर राय, राघवेंद्र झा, सूर्य नारायण झा, प्रो अशोक झा, अनिल कुमार नाथ, रंजना झा, कृष्णा देवी, इंदु मिश्र, रागिनी देवी सहित अन्य सक्रिय रूप से लगे है.

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