जीएसटी. 20 लाख सालाना तक के कारोबारी को निबंधन की जरूरत नहीं

एक जुलाई से लागू होने वाली नयी कर प्रणाली को ले फैला है भ्रम छोटे व्यवसायी व उपभोक्ताओं पर असर नहीं, रुकेगी टैक्स की चोरी सहरसा : 30 जुलाई की रात संसद भवन में बैठक आयोजित होगी. ठीक 12 बजे घंटा बजेगा और देश में नयी बिक्री कर प्रणाली लागू हो जाएगी. यानि एक जुलाई […]

एक जुलाई से लागू होने वाली नयी कर प्रणाली को ले फैला है भ्रम

छोटे व्यवसायी व उपभोक्ताओं पर असर नहीं, रुकेगी टैक्स की चोरी
सहरसा : 30 जुलाई की रात संसद भवन में बैठक आयोजित होगी. ठीक 12 बजे घंटा बजेगा और देश में नयी बिक्री कर प्रणाली लागू हो जाएगी. यानि एक जुलाई से किसी भी तरह की खरीद-बिक्री माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में आ जाएगी. जीएसटी को लेकर छोटे व्यवसायियों में कई तरह के भ्रम हैं. जैसे वे व्यवसाय तब ही कर सकेंगे, जब उनका फर्म जीएसटी के अंतर्गत निबंधित होगा. उन्हें अभी से ज्यादा टैक्स वहन करना होगा.
वे कागजात के झमेले में पड़ जायेंगे. उन पर सरकार व विभाग की कड़ी निगहबानी बनी रहेगी. इसी तरह ग्राहकों में इस बात की चिंता है कि जीएसटी लागू होने के बाद वस्तुओं के मूल्य में अप्रत्याशित वृद्धि हो जायेगी. कई वस्तु उनकी पहुंच से दूर हो जायेगी. लेकिन ऐसा कुछ नहीं है.
टैक्स की चोरी पर लगेगा विराम
सरकार ने यह पहले ही साफ कर दिया है कि सलाना 20 लाख रुपये तक का व्यवसाय करने वाले व्यवसायियों के लिए जीएसटी के अंतर्गत निबंधन कराने की आवश्यकता नहीं है. जबकि वैट के अंतर्गत 10 लाख रुपये तक की ही छूट थी. फिर भी यदि व्यवसायी स्वेच्छा से जीएसटी के तहत निबंधन कराना चाहते हैं तो करा सकते हैं. हां अलग-अलग कर निर्धारण से कुछ वस्तुओं की कीमत में आंशिक वृद्धि होगी तो कई वस्तुओं के मूल्य घटेंगे भी. लेकिन जो भी कीमत तय होगी, पूरे देश में एक होगी. कुछ वस्तुओं को टैक्स के दायरे से अलग रखा जायेगा. जबकि अभी के कई टैक्स फ्री वस्तुओं पर कर का निर्धारण होगा. जीएसटी लागू होने से कर की चोरी पर विराम लगेगा. कालाबाजारी पर भी अंकुश लगने की संभावना बनेगी.
कर प्रणाली का सबसे बड़ा परिवर्तन: आयकर एवं बिक्री कर के वरीय अधिवक्ता संतोष कुमार दत्ता ने बताया कि एक जुलाई से देश में जीएसटी (माल एवं सेवा कर अधिनियम) लागू हो रहा है. इसके तहत पूरे देश में एक समान कर दर लागू होगी.
वर्तमान में केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा लागू अनेक टैक्स जीएसटी में समाहित हो जाएंगे. जीएसटी में वाणिज्य कर, केंद्रीय बिक्री कर, सेवा कर, सेंट्रल सेश, प्रवेश कर, स्टेट वैट, उत्पाद शुल्क, लक्जरी टैक्स, इंटरटेनमेंट टैक्स, एडवरटिजमेंट टैक्स जैसे अलग-अलग करों को सरलीकृत केंद्रीयकृत कर प्रणाली का रूप दिया गया है. भारत में अब तक के कर प्रणाली का यह सबसे बड़ा व अमूलचूल परिवर्तन है. इतने व्यापक पैमाने पर इससे पूर्व कभी भी ऐसा बदलाव नहीं किया गया था. उन्होंने बताया कि जीएसटी के प्रावधान से व्यवसायी सहित उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी.
अधिवक्ता श्री दत्ता ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद व्यवसायियों को सभी विवरण ऑन लाइन ही दाखिल करना होगा. करों का भुगतान भी ऑन लाइन होगा. जिससे कंप्यूटर व इंटरनेट का उपयोग व ज्ञान आवश्यक हो जायेगा. इससे बड़े व्यापारियों को कोई परेशानी नहीं होगी. लेकिन कुछ दिनों तक छोटे व्यवसायियों को असुविधा जरूर होगी. ऐसे व्यवसायी सेवा प्रदाताओं की सेवा प्राप्त कर अपना कार्य सुचारु रूप से कर सकते हैं. चूंकि जीएसटी कर प्रणाली का एक अभूतपूर्व परिवर्तन है. अतएव शुरुआती दौर में कुछ असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है. लेकिन निकट भविष्य में ही इसके फायदे दिखने लगेंगे.
जीएसटी के अंतर्गत निबंधित व्यवसायियों को प्रतिमाह तीन विवरणी व एक वार्षिक ऑन लाइन दाखिल करना होगा. पहला विवरण अगले माह की 10वीं तारीख तक, दूसरा 15वीं व तीसरा 20वीं तारीख तक ऑन लाइन जमा करने की बाध्यता होगी. साल के 36 विवरणों के अलावा वर्ष के अंत में एक विशेष विवरण भी जमा करने होंगे. इस तरह एक निबंधित व्यवसायी को एक साल में कुल 37 रिटर्न दाखिल करने होंगे. 75 लाख रुपये तक का कारोबार करने वालों को समाहितीकरण की छूट है. जिसके लिए उन्हें विभिन्न प्रकार के करों का भुगतान करना होगा. समाहितीकरण के अंतर्गत आने वाले व्यवसायी को पूरे साल में सिर्फ एक ही विवरण दाखिल करने की अनिवार्यता होगी.

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