राजनीति की भेंट चढ़ा पुस्तकालय

नासरीगंज : डेढ़ दशक पूर्व अमियावर गांव में बना पुस्तकालय राजनीति की भेंट चढ़ चुका है. बताया जाता है कि विश्व जागृति मिशन से जुड़े लोगों ने 1999 में तत्कालीन बीडीओ दीपू कुमार के सहयोग से 65 हजार की लागत से एक पुस्तकालय का निर्माण कराया था. उस पुस्तकालय का शिलान्यास पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री […]

नासरीगंज : डेढ़ दशक पूर्व अमियावर गांव में बना पुस्तकालय राजनीति की भेंट चढ़ चुका है. बताया जाता है कि विश्व जागृति मिशन से जुड़े लोगों ने 1999 में तत्कालीन बीडीओ दीपू कुमार के सहयोग से 65 हजार की लागत से एक पुस्तकालय का निर्माण कराया था. उस पुस्तकालय का शिलान्यास पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री कांति सिंह ने किया था. शिलान्यास के छह माह बाद पुस्तकालय भवन बनते ही इस पर राजनीति शुरू हो गयी थी. जिसका परिणाम यह हुआ कि आज उस पुस्तकालय भवन में न तो किवाड़ है और न ही खिड़की. असमाजिक तत्वों ने उक्त भवन की खिड़की व किवाड़ तोड़ लिये हैं. लाइब्रेरी की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है.

देखरेख के अभाव में भवन जीर्ण शीर्ण अवस्था मे पहुंच चुका है. लोगों ने पुस्तकालय का नाम बदल कर शहीद भगत सिंह पुस्तकालय रख दिया है. पुस्तकालय की नींव रखनेवाले धनजी सिंह का कहना है कि पुस्तकालय को तहस नहस करनेवाले अब भगत सिंह का नाम बदनाम कर रहे हैं. हालांकि गांव को गोद लेने के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने उक्त पुस्तकालय के पुनर्निर्माण की बात कही. गांव की मुखिया गुड़िया सिंह ने पुस्तकालय के बारे में बताया कि इसका नये सिरे से विकास किया जायेगा.

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