उपेक्षा. सुविधाओं से वंचित है बिक्रमगंज रेलवे स्टेशन
बिक्रमगंज रेलवे स्टेशन.
बिक्रमगंज (कार्यालय) : आरा-सासाराम रेलखंड पर स्थित बिक्रमगंज रेलवे स्टेशन को एक दशक बाद भी बुनियादी सुविधा मयसर नहीं हो सका है. पेयजल, शौचालय, शेड सहित विभिन्न समस्या से लोगों को जूझना पड़ रहा है. यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय का निर्माण किया गया है. जिसका उद्घाटन डीआरएम मुगलसराय के द्वारा वर्ष 2015 में ही किया गया, लेकिन अभी तक उसे यात्रियों को सुपूर्द नहीं किया जा सका है. प्रतीक्षालय रेलवे का स्टोर रूम बनकर रह गया है. यात्री प्रतीक्षालय और शेड के अभाव में स्टेशन से दूर पेड़ के छाये में खड़ा होकर गाड़ी का इंतजार करते है. शौचालय और पेजजल की सुविधा नहीं होने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. सबसे अधिक परेशानी महिला यात्रियों को होती है.
शौच के लिए स्टेशन के बाहर खुले में खेतों में जाना पड़ता है. एक तरफ सरकार खुले में शौच नहीं करने को कहती है वहीं दूसरी ओर रेलवे विभाग की लापरवाही के कारण लोग खुले में शौच करने के लिए विवश है. गौरतलब हो कि आरा-सासाराम रेल खंड पर सबसे पहले बिक्रमगंज से सासाराम के लिए परिचालन शुरू किया गया था. तत्कालीन रेल मंत्री लालु प्रसाद यादव एक दशक पूर्व इस रेल खंड पर हरी झंडी दिखाकर परिचालन बिक्रमगंज से शुरू किये थे. इसके कुछ वर्षो बाद पीरों और फिर आरा से परिचालन शुरू किया गया. आधा-अधूरे बने रेलवे स्टेशन से आनन-फानन में परिचालन शुरू किया गया था. रेलगाड़ी के परिचालन के एक दशक से भी अधिक समय होने को है, लेकिन सुविधाएं पूर्व की तरह ही है. स्टेशन पर कोई शेड नहीं है. दो-तीन छोटे-छोटे छतरी लगाया गया है, वह भी प्लेटफॉर्म के एक ही तरफ. पेयजल की सुबिधा के लिए पानी टंकी का निर्माण कार्य दो वर्ष पूर्व में शुरू किया गया, लेकिन अभी तक पानी टंकी का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है. स्टेशन पर लाईट का भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. स्टेशन में जनरेटर उपलब्ध है, सोलरप्लेट लगाये गये है, लेकिन उसका उपयोग स्टेशन पर रौशनी के लिए नहीं किये जाते है. बिजली रहती है तो रौशनी होती है. नहीं तो पूरा स्टेशन अंधेरों में डुबा रहता है.
यात्रियों की व्यथा : दावथ प्रखंड क्षेत्र के इटवां निवासी गुड़िया देवी कहती हैं कि बिक्रमगंज स्टेशन पर जाने से पहले सारी व्यवस्था बाजार से ही कर लेनी पड़ती है. पीने के लिए पानी बोतल में भर कर ले जाते हैं. सबसे अधिक परेशानी शौच को लेकर होती है. जरूरत पर बाहर खेतों में जाना पड़ता है. धावां निवासी लवली कहती हैं कि स्टेशन पर गाड़ियों के इंतजार करने के लिए खुले आकाश के नीचे खड़ा होना पड़ता है. लोगों को धूप, बारिश सहित सभी मौसम का प्रभाव झेलना पड़ता है. स्थानीय शहर निवासी व्यवसायी राजु कुमार कहते हैं कि स्थानीय रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है. रात के समय गाड़ी से उतरने के बाद यह भय बना रहता है कि यहां से सुरक्षित घर पहुंचेंगे या नहीं.
यात्री प्रतीक्षालय खुला रहता है, लेकिन गलत दिशा में बन जाने के कारण कोई वहां नहीं जाता है. पेयजल की व्यवस्था पानी टंकी के निर्माण कार्य पूरा होते ही सुदृढ़ हो जायेगी. शेड व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वरीय अधिकारियों से आग्रह किया गया है.
शिवजी प्रसाद, स्टेशन मास्टर
