करवंदिया क्षेत्र में खनन के लिए सरकारी स्तर पर कवायद शुरू
मुख्यमंत्री के आगमन के बाद जमीन अदला-बदली की शुरू हुई प्रक्रिया
सासाराम नगर : जिले में करवंदिया, अमरा व बांसा खदान क्षेत्र के ईदगिर्द वन विभाग की कितनी जमीन है. इसकी जानकारी विभाग के अधिकारियों को नहीं है. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा निश्चय यात्रा के दौरान कैमूर पहाड़ी की बंदोबस्ती करने का संकेत देने के बाद सरकारी स्तर पर इसकी कवायद शुरू हो गयी है. शनिवार को मुख्यमंत्री के जाने के बाद खनन एवं भूतत्व विभाग के मुख्यालय उप निदेशक विश्वजीत डे ने खनन क्षेत्र का निरीक्षण किया था.
उसी दौरान उप निदेशक ने बताया था कि करवंदिया क्षेत्र में पत्थर उत्खनन कार्य शुरू करने के लिए सरकारी स्तर पर कवायद की जा रही है. पहाड़ी में वन विभाग की भूमि है. जिसे खनन विभाग लेने की तैयारी कर रहा है. वन विभाग की भूमि मिलने पर 20 से 30 ब्लॉक बढ़ जायेंगे. इसके बदले वन विभाग को करीब चार सौ एकड़ भूमि देने के लिए नौहट्टा प्रखंड में सरकारी भूमि का चयन किया गया है. तीन दिनों से अधिकारियों की टीम खदान क्षेत्र का निरीक्षण कर रही है. टीम में वन विभाग के अधिकारी भी शामिल रहते हैं. वन क्षेत्र के जानकारी नहीं होने के कारण पत्थर माफिया इस का वर्षों से फायदा उठा रहे हैं. जब खदान में खनन कार्य पर रोक नहीं था, तो उस समय भी चोरी छीपे वन भूमि से अवैध खनन धड़ल्ले से होता था. खनन पर रोक के बाद भी वन क्षेत्र में खनन होता रहा. मुख्यमंत्री के निश्चय यात्रा के दौरान पुनः खनन शुरू होने के संकेत के बाद खनन खेत्र में निरीक्षण का दौर शुरू हो गया है. अधिकारियों के साथ क्रशर संघ के लोग भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
जमीन की जानकारी देने से बचते रहे अधिकारी : खनन क्षेत्र के ईद गिर्द वन विभाग की कितनी भूमि है इसकी जानकारी के लिए जब वनों के क्षेत्र पदाधिकारी अरविंद कुमार वर्मा ने बात किया गया तो उन्होंने हमेशा कोई न कोई बहाना बना कर सवाल को टालते रहे.फोन करने पर उन्होंने कहा कि अभी में अधिकारियों के साथ में हूं. वन भूमि की मापी नहीं खदान क्षेत्र का निरीक्षण किया जा रहा है. दूसरी बार फोन करने पर कहा कि विभाग द्वारा जमीन की मापी नहीं करायी गयी है.
जब उन से बोला गया कि लगभग ही बता दीजिए चूंकि खनन विभाग वन विभाग की भूमि के बदले चार सौ एकड़ जमीन नौहट्टा में देने की कवायद में जुटी है.कितनी भूमि वन विभाग से खनन विभाग ले रही है तो उन्होंने फोन काट दिया. मंगलवार को फोन करने पर कहा कि अभी मैं बैंक में बाद में बात करूंगा.डीएफओ से जब मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गयी तो उनका मोबाइल बंद था. जबकि खनन विभाग को पता है कि खदान क्षेत्र में वन विभाग की कितनी भूमि है.
