घटना के एक घंटे बाद पुलिस पहुंची, तो क्रेन दो घंटे के बाद
बाराडीह के पास हुई दुर्घटना के बाद गांव के लोगों की तत्परता ने कई लोगों की जान बचायी़ घटना के बाद पहुंचे लोगों ने बस में फंसे व पानी में गिरे लोगों को जल्दी-जल्दी बाहर निकाल कर अस्पताल भेजवाया़ घटनास्थल पर समय से क्रेन नहीं पहुंचने पर आक्रोश भी जताया़
सासाराम (नगर) : बाराडीह गांव के समीप नहर पुल से उतरते बस के एक चाट में पलटने की घटना में यात्रियों की जान बचाने में गांववालों की सक्रियता का काफी काम आयी़ गांव के लोगों की तत्परता से ही कई लोगों की जान बचायी जा सकी़ घटना के चंद मिनट बाद ही सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे. ग्रामीण पानी व कीचड़ की परवाह किये बिना घायल यात्रियों को बस से निकालने में जुट गये.
दर्जनों यात्री बस से बाहर पानी में गिर गये थे, जो निकल नहीं पा रहे थे. करगहर थाना क्षेत्र की कुड़ियारी निवासी रवि शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, प्रियंका देवी, जलालपुर गांव के विजय शर्मा व अंकिता कुमारी की जान ग्रामीणों की तत्परता से बच सकी. घटनास्थल पर घटना के एक घंटे बाद पुलिस पहुंची, तो अधिकारी दो घंटे बाद क्रेन ले कर दलबल के साथ पहुंचे. समरडिहा पंचायत के मुखिया के पति काशीनाथ सिंह घायलों को निजी वाहनों से अस्पताल भेजने में लगे रहे.
चितौली, बेरूकहीं, कोनार, बाराडीह आदि गांवों के लोग बस के नीचे दबे एक यात्री को निकालने की काफी कोशिश किये. मगर उन्हें सफलता नहीं मिली़ बाद में पहुंची क्रेन व अर्थमूरवर (जेसीबी) ने बस को चाट से बाहर निकाला. इसके बाद ही बस के नीचे दबे शव को बाहर निकाला जा सका़ शव की पहचान लड्डू मियां के रूप में हुई़ हालांकि, गांव के लोगों को आशंका थी की बस के नीचे कई लोग दबे हो सकते हैं.
आक्रोशितों ने जिप अध्यक्ष को रोका
घटनास्थल पर राहत कार्य शुरू करने व क्रेन पहुंचने में हो रही देरी से आक्रोशित लोगों ने करगहर जा रहे जिला पर्षद अध्यक्ष नथुनी राम को रोक कर वाहन से उतार दिया. मौके पर उपस्थित मुफस्सिल थानाध्यक्ष दीनानाथ कुमार ने ग्रामीणों को समझाया. जिप अध्यक्ष ने लोगों को क्रेन मांगने व राहत कार्य तत्काल शुरू कराने का आश्वासन दिया. जिप अध्यक्ष भी राहत कार्य में जुट गये.
दादा का अंतिम दर्शन करने निकली, पर रास्ते में गयी बेटी की जान
जयनगरा गांव की अजमेरी खातून ने कहा, तीन बच्चों के साथ करगहर के शिवपुर में अपने दादा की शवयात्रा में शामिल होने जा रही थी. लेकिन, खुदा को कुछ और ही मंजूर था. उसने मेरी बेटी शबाना को ही मुझसे छीन लिया. अपने दादा का अंतिम दीदार भी मयस्सर हुआ और बेटी भी बिछड़ गयी.
10 मिनट में ससुराल पहुंच जाता लड्डू
बस के नीचे दो घंटे तक दबे रहने से लड्डू मियां की मौत हो गयी. सहयात्री परवेज ने बताया कि ईद के मौके पर लड्डू अपने ससुराल कैथी गांव जा रहा था. वह काफी खुश था. अब मात्र 10 मिनट का रास्ता बचा था. बस कोनार मोड़ पहुंचने वाली ही थी कि इसके पहले चाट में पलट गयी व नीचे दब कर दम घुटने से उनकी मौत हो गयी.
