हाल के दिनों में न्यायालय परिसर में बम विस्फोट व अन्य घटनाएं बढ़ गयी है़ व्यवहार न्यायालय सासाराम में परिसर के बाहर भी बम विस्फोट की घटना हो चुकी है. बावजूद कोर्ट परिसर की सुरक्षा को लेकर प्रशासन मुस्तैद नहीं है. न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने के कारण कोई भी न्यायालय परिसर में आसानी से आकर सुरक्षा में सेंध लगा सकता है.
न्यायालय परिसर में सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे हैं. इसके कारण घटना के बाद अपराधियों की पहचान करने में काफी दिक्कत हो सकती है़ सासाराम के साथ ही आरा, छपरा सहित कई अन्य जिलों के जेलों में भी बम विस्फोट होने के बाद इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता होना स्वभाविक है.
सासाराम(नगर) : व्यवहार न्यायालय मॉर्निंग होने के कारण न्यायालय का कार्य सोमवार को 6:30 बजे सुबह से ही शुरू हो गया़ न्यायालय के कर्मचारी व अधिवक्ता छह बजे से ही परिसर में आने लगे़ साथ ही मुकदमा से संबंधित लोग भी आ-जा रहे थे. इन लोगों की खोज खबर लेने के लिए गेट पर कोई पुलिस जवान मुस्तैद नहीं था. 6:16 बजे व्यवहार न्यायालय परिसर के पश्चिमी गेट से न्यायाधीश, दंडाधिकारी व अधिवक्ताओं को आने के बाद गेट में ताला लगा दिया गया है. इस गेट से भी आम लोग न्यायालय परिसर में आना-जाना कर रहे थे.
हालांकि, कुछ देर के बाद न्यायालय का आदेश पाल आ कर गेट में ताला लगा दिया. व्यवहार न्यायालय की शाखा जीटी रोड से उत्तर दिशा में स्थित अनुमंडल कार्यालय परिसर के अंदर भी है. जहां की सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे है. 6:52 बजे सदर अनुमंडल कार्यालय परिसर में स्थित गेट पर कोई पुलिस के जवान नहीं दिखा. इस परिसर में तीन न्यायिक दंडाधिकारी सहित कई न्यायालय का कार्यालय भी है. न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगने की अनुमति प्रशासन द्वारा दी गयी है.
लेकिन, परिसर में अभी तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाये गये हैं. कैमरे नहीं लगाये जाने से परिसर में आने-जानेवालों पर नजर रखने में भी परेशानी हो रही है. व्यवहार न्यायालय में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है. इससे न्यायालय में आनेवाले लोगों को अपनी बाइक परिसर से बाहर ही सड़क किनारे खड़ी करनी पड़ती है. बेतरतीब ढंग से मोटरसाइकिलें व चारपहिया वाहनों के खड़े रहने के कारण लोगों को परेशानी होती है. इस स्थिति में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है.
व्यवहार न्यायालय सासाराम परिसर के बाहर भी बम विस्फोट की घटना हो चुकी थी. बावजूद न्यायालय परिसर में उसके बाद से ही सुरक्षा को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया है़ कोई भी व्यक्ति न्यायालय परिसर में आसानी से आकर सुरक्षा में सेंध लगा सकता है. व्यवहार न्यायालय परिसर में प्रवेश करने के लिए पूरब व पश्चिम दिशा में गेट है. घटनाओं के बाद न्यायालय का पूर्वी गेट आम लोगों के लिए खोला गया है. गेट पर मेटल डिटेक्टर लगा है. कोर्ट की सुरक्षा के लिए चार जवानों को तैनात किया गया है, जो सुरक्षा व्यवस्था के लिए बहुत कम है. वहीं, जीटी रोड के उत्तर तरफ अनुमंडल कार्यालय परिसर में स्थित कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है.
पािर्कंग की व्यवस्था नहीं, हो सकता है हादसा
जिला विधिक संघ के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार ओझा ने बताया कि व्यवहार न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है. खास कर न्यायालय परिसर में आनेवाले मुवक्किलों व अधिवक्ताओं के वाहनों को खड़ा करने के लिए कोई पार्किंग की व्यवस्था नहीं है. इसके कारण परिसर के बाहर सड़क किनारे वाहनों को खड़ा किया जाता है.
बेतरतीब ढंग से बाइक खड़ा करने से आने-जाने में तो परेशानी होती है. यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. एक माह पहले मार्च में एक बाइक पर रखे बम फट गया था. इसमें कई लोग घायल हो गये थे.
साथ ही दो मोटरसाइकिलें भी जल कर क्षतिग्रस्त हो गयीं थी. हालांकि, बम विस्फोट का साजिशकर्ता विजय कुमार को बहुत जल्द ही गिरफ्तार कर लिया गया था. वहीं, परिसर के बाहर अतिक्रमण कर खोली गयी दुकानों से भी सुरक्षा पर सवाल खड़ा होता है. इन दुकानों पर बाहर से आनेवाले लोगों का जमावड़ा लगा रहता है. जो कभी भी सुरक्षा में सेंध लगा सकते हैं. उन्होंने न्यायालय परिसर से दूर पार्किंग की व्यवस्था करने और न्यायालय की सुरक्षा के साथ ही अधिवक्ताओं की सुरक्षा का भी ख्याल रखने की प्रशासन से मांग की.
