ट्रेनों से उतरने में यात्रियों को लगता है डर
होती रहती हैं छोटी-मोटी चोरी की घटनाएं
बिक्रमगंज (रोहतास) : आरा-सासाराम रेलखंड पर अधिकारियों व कर्मचारियों की मनमानी से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. स्टेशनों पर न तो टिकट काउंटर खोलने का कोई समय निर्धारित है और न ही पूछताछ काउंटर ही बनाया गया है.
हाल्ट को कौन कहे, स्टेशनों पर भी रात के समय टिकट काउंटर बंद रहता है. सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है. इसके कारण रात की गाड़ी से लोगों को उतरने में डर लगता है. हमेशा छोटी-मोटी चोरी, राहजनी की घटनाएं होती रहती है. भय के कारण अधिकतर लोग रात के समय इस रेलवे मार्ग पर यात्रा नहीं करते हैं.
गौरतलब है कि आरा-सासाराम रेलखंड पर रात के समय दो-दो गाड़ियां हैं. पटना से सासाराम जाने वाली फास्ट पैसेंजर बिक्रमगंज स्टेशन पर शाम के सात से आठ बजे के बीच पहुंचती है. बनारस-आरा सवारी गाड़ी का समय रात के 11 बजे है, लेकिन हमेशा यह विलंब से पहुंचती है.
यह गाड़ी रात को 12 बजे से एक बजे के बीच हर दिन आती है. यात्री बताते हैं कि इस रेलखंड के किसी भी हाल्ट पर रात के समय टिकट नहीं मिलता है. बिक्रमगंज स्टेशन पर भी शाम के सवारी गाड़ी के जाते ही न केवल टिकट काउंटर, बल्कि पूरा कार्यालय बंद कर अधिकारी व कर्मचारी फरार हो जाते हैं. यात्री बताते है कि रात के समय स्टेशन पर कोई नहीं रहता है.
न तो सुरक्षा कर्मचारी होते हैं और न ही कोई अधिकारी. रात के समय अगर किसी को गाड़ी पकड़नी होती है तो वह भगवान भरोसे ही रहते हैं. न स्टेशन पर कोई सुरक्षा की व्यवस्था होती है और न ही गाड़ियों के संबंध में जानकारी देने वाला कर्मचारी या अधिकारी. परिणामत: गाड़ी के आने की जानकारी किसी को नहीं मिल पाती है. लिहाजा, लोगों को बिना टिकट ही यात्री करनी पड़ती है.
सुरक्षा के ख्याल से लोगों को अपने परिजनों को साथ लेकर स्टेशन पर आना होता है. सबसे परेशनी उन बाहर के यात्रियों को होती है, जिन्हें किसी कारण शहर में विलंब हो गया और रात वाली गाड़ी को पकड़ कर यात्रा करने को विवश हैं. कर्मचारियों की इस लापरवाही के कारण हर दिन पूरी गाड़ी खाली जाती है. इससे रेलवे को भारी क्षति होती है.
