बिना मकान बनाये ही मिली पूरी राशि, फाइनल रिपोर्ट भी जारी

अकोढ़ीगोला : प्रखंड क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभार्थी के चयन में कमीशन लेने की आरोप लगता रहा है. लेकिन पकड़िया पंचायत के खपड़ा गांव में एक मामला का उजागर हुआ है. इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना की पूरी राशि निकलने के बाद भी लाभुक मकान नहीं बनाया. पूरी राशि ही गटक ली और आवास […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

अकोढ़ीगोला : प्रखंड क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभार्थी के चयन में कमीशन लेने की आरोप लगता रहा है. लेकिन पकड़िया पंचायत के खपड़ा गांव में एक मामला का उजागर हुआ है. इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना की पूरी राशि निकलने के बाद भी लाभुक मकान नहीं बनाया. पूरी राशि ही गटक ली और आवास सहायक ने प्रखंड कार्यालय में फाइनल रिपोर्ट देकर उसका जियो टैगिंग भी करा दी.

कुछ माह पहले यह मामला का उजागर होने और अधिकारियों के दबाव के बाद लाभार्थी सिंचाई विभाग की जमीन पर मकान बना रहा है. इसको लेकर किसान संतोष सिंह ने डीएम दरबार और लोक शिकायत निवारण केंद्र में शिकायत दर्ज करायी है. उसका आरोप है कि सिंचाई विभाग के पइन की जमीन पर अवैध रूप से आवास योजना के तहत मकान बनाया जा रहा है, जिसे अवैध बताते हटाने की मांग की है.
क्या है मामला: आवास योजना के तहत खपड़ा गांव के स्व करमु राम की पत्नी धर्मशीला कुंवर को मकान बनाने के लिए वर्ष 2016/17 में प्रथम किस्त मिली थी. वर्ष 2017/18 में दूसरी व तीसरी किस्त मिली. इसके बाद भी मकान नहीं बना. कुछ माह पूर्व अधिकारियों के दबाव के बाद लाभार्थी सिंचाई विभाग की जमीन पर मकान बना रहा है.
लाभुकों को राशि वितरण की क्या है प्रक्रिया
बीएपीएल परिवारों की सूची में क्रमांक अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना का चयन किया जाता है. आवास सहायक द्वारा इसकी भौतिक सत्यापन किया जाता है. परती जमीन की फोटो खिंचा जाता है. उसके बाद योजना की राशि की प्रथम किस्त दी जाती है. प्रथम किस्त की राशि से निर्माण की जांच कर जियो टैगिंग की जाती है.
इसी प्रकार दूसरी और पूरी निर्माण के बाद तीसरी किस्त दी जाती है. लेकिन इस मामले में तीनों किस्त लाभार्थी को दे दी गयी. और इसकी जियो टैगिंग भी करा दी गयी. इसमें आवास सहायक की लापरवाही कहें या मिलीभगत. यह मामला अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा.
क्या कहते हैं अधिकारी
प्रखंड विकास पदाधिकारी कुंदन कुमार का कहना है कि मामला जानकारी में है. इसके फाइलों को देख रहे हैं. लाभार्थी किस जमीन का पेपर दिया है. उस जमीन पर निर्माण क्यों नहीं हुआ. निर्माण नहीं हुआ तो तीनों किस्तों को क्यों दिया गया. इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा की जायेगी. वहीं लाभार्थी अवैध जमीन पर आवास योजना की राशि से मकान बना रहा है. उसे गलत मानते हुए दी गयी राशि को वापस करने की कार्रवाई की जायेगी.
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