आरक्षण विवाद पर नेताओं का पक्ष

आरक्षण पर विवाद नहीं संवाद हो, सवर्ण समाज की चिंताओं पर भी हो बात; उपेंद्र कुशवाहा बोले- चिराग पासवान को समझने की जरूरत

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद पर संयम बरतने की अपील की है. उन्होंने कहा कि वंचितों के हितों के साथ सवर्णों की चिंताओं को भी दूर करना जरूरी है. कुशवाहा ने चिराग पासवान के आरक्षण रुख पर भी निशाना साधा और संसद में व्यापक विमर्श की वकालत की.

Reservation Reform : आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद के बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने सभी पक्षों से संयम बरतने और विवाद के बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है. उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति समेत वंचित वर्गों के हितों का संरक्षण जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही सवर्ण समाज की चिंताओं को भी दूर किया जाना चाहिए. किसी एक वर्ग के हितों की रक्षा का मतलब दूसरे वर्ग का शोषण करना नहीं हो सकता.

आरक्षण खत्म करने का सवाल ही नहीं, समानता आने तक जारी रहना चाहिए

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि संविधान में आरक्षण की व्यवस्था सामाजिक समानता स्थापित करने के उद्देश्य से की गयी थी. बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में बनी व्यवस्था का उद्देश्य उन वर्गों को आगे बढ़ाना था, जो लंबे समय तक सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े रहे. उन्होंने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था शुरू में सीमित अवधि के लिए की गयी थी, लेकिन आज भी समाज का बड़ा तबका पूरी तरह आगे नहीं बढ़ पाया है. जब तक वास्तविक समानता नहीं आती, तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी.

कोटे में कोटा पर बोले- सुप्रीम कोर्ट ने भी माना, जरूरतमंदों तक पहुंचे लाभ

कुशवाहा ने आरक्षण के भीतर कोटा तय करने की व्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा कि समाज के सभी वर्गों के बीच विकास का स्तर समान नहीं है. उन्होंने कहा कि जिन समुदायों की साक्षरता दर बेहद कम है, उन्हें आरक्षण का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से मिलना चाहिए. इसी उद्देश्य से कोटे में कोटा की व्यवस्था की गयी है. उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस व्यवस्था को उचित माना है.

चिराग पासवान पर निशाना, कहा- जमीन की पीड़ा समझना जरूरी

आरक्षण के मुद्दे पर चिराग पासवान के रुख को लेकर कुशवाहा ने कहा कि जिस व्यक्ति ने जमीन पर संघर्ष और अभाव नहीं देखा, उसके लिए वंचित समाज की पीड़ा को समझना मुश्किल हो सकता है. उन्होंने कहा कि झोपड़ियों और बेहद गरीब बस्तियों में रहने वाले परिवारों के बच्चों की शिक्षा और साक्षरता की स्थिति आज भी चिंताजनक है. ऐसे वर्गों को आगे बढ़ाने के लिए आरक्षण जैसी व्यवस्था जरूरी है.

सवर्ण समाज की चिंता भी सुने सरकार

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि अगर सवर्ण समाज के लोगों के मन में भी किसी तरह की चिंता या असुरक्षा है, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. सरकार की जिम्मेदारी है कि अनुसूचित जाति-जनजाति और अन्य वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ दूसरे वर्गों की चिंताओं का भी समाधान करे. उन्होंने कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास और चिराग पासवान को लेकर भी उन्होंने इसी संदर्भ में अपनी बात रखी है.

संसद में हो आरक्षण व्यवस्था पर व्यापक विमर्श

उन्होंने कहा कि आरक्षण को लेकर अगर कहीं कोई समस्या है तो उसे लेकर आपस में विवाद करने के बजाय बैठकर चर्चा होनी चाहिए. इस मुद्दे को संसद के स्तर पर भी व्यापक विमर्श के लिए ले जाना चाहिए, ताकि सभी वर्ग अपनी राय रख सकें और सरकार उचित समाधान निकाल सके. उन्होंने लोगों से हाथ जोड़कर अपील की कि आरक्षण के मुद्दे पर आपसी विवाद से बचें.

सम्राट चौधरी को हटाने की चर्चा पर भी दिया जवाब

उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पद से हटाये जाने की चर्चाओं को भी खारिज किया. उन्होंने कहा कि यह बात कहां से आयी और किसने कही, यह समझ से परे है. सम्राट चौधरी विधिवत अपना काम कर रहे हैं और उन्हें नीतीश कुमार तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद प्राप्त है. उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी को एनडीए के नेता के रूप में चुना गया है और वह अच्छा काम कर रहे हैं.

बोले- हटाने की अफवाह से राज्य में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश

कुशवाहा ने कहा कि सम्राट चौधरी को हटाये जाने की बात करने वाले लोग राज्य में भ्रम और अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं. उन्होंने ऐसी चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि बिहार में एनडीए नेतृत्व को लेकर किसी तरह की असमंजस की स्थिति नहीं है. उन्होंने कहा कि इस तरह की अफवाह फैलाने वाले राज्य के हित में काम नहीं कर रहे हैं.

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By विवेक सिंह

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